हरदोई। 2013 के बाद अक्तूबर के पहले हफ्ते में 50 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई है। जिले में रुक-रुककर हो रही बारिश से खरीफ की 25 फीसदी से अधिक फसल बर्बाद हो चुकी है। इससे किसानों को बड़ा झटका लगा है। अब मूंग, उड़द और मूंगफली की फसल पकने और कटने की स्थिति में है। इस वजह से इन फसलों को अधिक नुकसान हुआ है।
वहीं बारिश और नमी बढ़ने से धान की फसल में भी जीवाणु पत्ती झुलसा रोग का प्रकोप बढ़ गया है। इससे धान की फसल के पत्ते मुरझाकर सूखने लगे हैं। हालांकि कृषि अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक खेतों में पहुंचकर फसलों का जायजा लेने के साथ किसानों को उचित परामर्श दे रहे हैं।
10 साल बाद अक्तूबर के पहले हफ्ते में बारिश का आंकड़ा 50 मिलीमीटर को पार कर गया है। इसका सबसे अधिक प्रभाव फसलों पर देखने को मिल रहा है। जिले में इस बार 2 लाख 16 हजार 470 हेक्टेयर क्षेत्र में धान, उड़द, मूंग और मूंगफली फसल बोयी गई है।
इसमें सबसे अधिक 1 लाख 19 हजार 341 हेक्टेयर में धान बोया गया है। जिसमें बारिश के चलते करीब 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की फसल को नुकसान पहुंचा था।
तिलहन की फसल के कटने का समय पूरा होने वाला है, इसलिए इस फसल को अधिक नुकसान होने की बात किसान कह रहे हैं। किसान दिनेश सिंह, राजू का कहना है कि जिस प्रकार से बारिश हो रही है, उसे देखते हुए अब फसलों से लागत निकलना भी मुश्किल दिख रहा है।
उप निदेशक कृषि डा. नंद किशोर का कहना है कि इस समय हो रही बारिश से दलहनी और तिलहन की फसलों को अधिक नुकसान हुआ है। कुल क्षेत्र का 25 फीसदी से अधिक का नुकसान अब तक हो चुका है।
यदि बारिश तीन से चार दिन और हुई, तो यह नुकसान बढ़ जाएगा। धान की जिस फसल में बाली निकल आई है, उसे अधिक नुकसान हुआ है। तेज हवा चलने से धान की फसल गिर भी गई है। इसका सर्वे कराया जाएगा।
उर्वरक का संतुलित मात्रा में करें उपयोग
धान की फसल 90 दिन से अधिक की हो गई है। इस समय लगातार बारिश और वातावरण में नमी ज्यादा होने से फसल में झुलसा रोग का प्रकोप देखा जा रहा है। इस रोग के प्रभाव से फसल गोल-गोल घेरे में सूखने लगती है। इससे बचाव के लिए किसानों को नाइट्रोजन उर्वरक का संतुलित मात्रा में उपयोग करना चाहिए।
फसल का नाम क्षेत्रफल
धान 1 लाख 19 हजार 341 हेक्टेयर
मूंग 12 हजार हेक्टेयर
उड़द 30 हजार 960 हेक्टेयर
तिलहन 25 हजार 576 हेक्टेयर