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Hardoi News: दवा है खानी, तो बाहर से खरीद लाओ पानी

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फोटो-24- आयुष विंग में पानी की व्यवस्था ना होने के कारण बंद शौचालय - फोटो : HARDOI
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हरदोई। अरे चौंकिये मत यह कोई अतिशयोक्ति नहीं हैं बल्कि सच्चाई है मेडिकल कॉलेज में स्थापित आयुष अस्पताल की। जहां पिछले दो सालों से पाइप लाइन खराब होने के चलते मरीजों और तीमारदारों को तो छोड़ो, अस्पताल कर्मियों और चिकित्सकों तक को पानी नसीब नहीं है।
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जब उन्हें प्यास लगती है, तो घर से लाया गया पानी उनके सूखे हलक को सींचता है। वहीं मरीजों को यदि दवा खानी होती है, तो उन्हें बाहर से बोतल बंद पानी खरीद कर लाना पड़ता है।
जिला चिकित्सालय परिसर में आयुष विंग का निर्माण वर्ष 2016 में कराया गया था। अस्पताल बनने के बाद यहां यूनानी और आयुर्वेदिक पद्धति से लोगों को इलाज मिलने लगा।
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कुछ समय तक अस्पताल की व्यवस्थाएं ठीक रहीं लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी और रखरखाव के अभाव में व्यवस्थाएं दम तोड़ने लगी। अब हालात ये हैं कि इनका खामियाजा डॉक्टर और तीमारदार भुगत रहे हैं।
आयुष विंग में इलाज के लिए आने वाले मरीज और तीमारदारों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा हैं। यह समस्या बीते दो साल से बनीं हुई है।
इस समस्या के बारे में कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक इसे दूर नहीं किया जा सका है। यहां प्रत्येक पद्धति के डॉक्टरों के केबिन में हाथ धोने के लिए, पानी पीने के लिए टोटी लगी हैं, लेकिन इनसे पानी नहीं निकलता है।
जिम्मेदारों का मानना है कि परिसर में मेडिकल कॉलेज का भवन निर्माणाधीन है। इसके कारण कहीं पर पाइपलाइन खराब हुई है। इस कारण पानी की व्यवस्था खराब बनी हुई है।
आयुष विंग में स्नान घर पर शौचालय बना हुआ है, लेकिन यहां पिछले दो सालों से लगी टोटियां सूखी पड़ी हैं। इस वजह से लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद यह सुविधाएं तो डॉक्टर के योग में आ रही हैं न ही मरीज और तीमारदारों के उपयोग में आ रही हैं।
आयुष विंग में होम्योपैथिक के डॉक्टर मरीजों को देखते हैं, जहां पर मरीजों की लाइन लगी रहती है। दवा लेने आई जुलेखा ने बताया कि पानी की यहां काफी परेशानी हो ती है, बच्चे को पानी पिलाने के लिए दुकान से बोतल खरीदनी पड़ी।
रोजाना यहां पर पहुंचते हैं 100 से ज्यादा मरीज
अस्पताल का रास्ता बदल जाने के कारण लोगों को इस अस्पताल में आने के लिए अभी भी भटकना पड़ रहा है। कुछ लोग तो मोबाइल से डॉक्टर पर बात करने के बाद अस्पताल पहुंचते हैं। इस तरह से रोजाना 100 से अधिक मरीज परामर्श लेने के लिए पहुंचते हैं।
वर्जन
आयुष विंग में पानी की व्यवस्था न होने की जानकारी नहीं है। यदि पाइप लाइन कहीं क्षतिग्रस्त है, तो उसे ठीक कराके जलापूर्ति चालू कराई जाएगी। डॉ. आरके तिवारी, सीएमओ

फोटो-25- सूखी पड़ी पानी की टोटी ऊपर रखी पानी की बोतल- फोटो : HARDOI

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