संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। नदियों में बाढ़ का पानी तेजी से कम होने लगा है, जलभराव वाले गांवों में गंदगी और कीचड़ पसरने लगा है। इससे गांवों में संक्रामक बीमारियों के पनपने की आशंका है। बैराजों से छोड़े वाले पानी की मात्रा कम होने व गंगा नदी में आगे के प्रवाह से पानी तेजी से निकलने से यहां पर गंगा, रामगंगा, गर्रा सहित गंभीरी व नीलम नदियों का पानी तेजी से कम हुआ है। घरों से पानी निकलने के बाद लोगों ने फिर से आशियानों को दुरूस्त करने की ध्यान देना शुरू किया है।
बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी मात्रा में कमी आई और रविवार को गंगा व रामगंगा नदी में एक लाख 23,618 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। गंगा नदी के पानी का प्रवाह आगे ठीक होने से नदियां किनारों के दायरे में आ गई हैं। गंगा नदी का पानी 135.85 मीटर, रामगंगा का पानी 135.60 मीटर और गर्रा नदी का पानी 144.05 मीटर पर आ गया है।
बिलग्राम के कटरी और सवायजपुर के कटियारी के प्रभावित 72 गांवों के खेतों से भी पानी उतर रहा है। गांवों के चारों ओर भरा पानी भी उतरने लगा है, हालांकि कई दिनों तक गांवों के चारों ओर पानी भरा रहने से गंदगी और कीचड़ तेजी से परसा है। इससे संक्रमित बीमारियों के पनपने की आशंका बढ़ी है। पानी उतरने के बाद गांवों में अब दुर्गंध ने भी वातावरण को दूषित बनाया है।
खेतों से पानी उतरने के बाद फसलों को नुकसान पहुंचा है। लोगों को मवेशियों के चारा के लिए अभी भी दिक्कतें बनी हुई हैं। बाढ़ के पानी में डूबे चारा को खिलाने से भी पशुपालन डर रहे हैं। डीएम एमपी सिंह ने बताया कि राजस्व विभाग के साथ ही ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वह बाढ़ से प्रभावित गांवों की फसलों और घरों को हुए नुकसान का आंकलन करते हुए रिपोर्ट तैयार कर उन्हें प्राप्त कराएंगे। बाढ़ से बेघर हुए लोगों को मकान दिलाए और फसलों के नुकसान पर मुआवजा दिलाया जाएगा।