हरदोई। आवारा मवेशी फसल के दुश्मन बने हुए हैं। कड़ाके की ठंड के बीच दिन ढलते ही अन्नदाता फसलों की रखवाली करने के लिए कंबल लपेटकर निकल पड़ते हैं। एक हाथ में टॉर्च और दूसरे हाथ में डंडा रहता है।
रात में करीब 3.50 डिग्री तापमान में जब कोई घर से निकलना नहीं चाहता। उस समय किसान आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा के लिए खेत में डटे रहते हैं। इनका कहना है कि परिवार चलाने के लिए पशुओं से फसलों को बचाना जरूरी है।
जिले में आवारा पशुओं का आतंक लगातार बढ़ रहा है। सिर्फ छुट्टा गोवंश ही नहीं, नीलगाय भी फसलों को तबाह कर रही हैं। ऐसे में किसान परिवार के लोगों को पालने के लिए खेतों की रखवाली करने के लिए मजबूर हैं।
सोमवार की रात गांव रम्मपुरवा और करनपुरवा सहित कई गांवों की हकीकत जानी गई, तो वहां कुछ किसान खेतों में पशुओं के पीछे डंडा लेकर दौड़ रहे थे। कई किसानों ने खेतों के बीच झोपड़ी बना ली और किसान यहां बैठकर अलाव पर तापते हुए फसलों की रखवाली कर रहे हैं।
पहले फसल उगाओ, फिर चौकीदार बनो
करनपुरवा गांव में आबादी से कुछ ही दूरी पर 50 वर्षीय किसान मिलीलाल टार्च की रोशनी से खेतों की रखवाली करते मिले। हमने पूछा तो कहने लगे, रोज का काम है। पहले फसल पैदा करो, फिर उसके चौकीदार बन जाओ।
20 से 25 आवारा पशुओं का झुंड घूमता है जो रात भर में पूरे खेत को तबाह कर देता है। वरना साहब, इतनी सर्दी में रजाई से निकलने को किसका मन करता है। मजबूरी ही है जो यहां खींच लाती है। पड़ोस के खेत पर ही करीब 45 साल के रामनिहोर भी हाथ में डंडा और टॉर्च लेकर नजर आए।
...हम हड़ताल भी तो नहीं कर सकते
किसानों से जब बात हुई तो कहने लगे कि आज उनका नंबर है। पूरी रात खेत की मेड़ पर बैठकर रखवाली करनी पड़ती है। कई बार तो ठंड लगने से बीमार हो चुके हैं, लेकिन हमारी समस्या किसी को दिखाई नहीं देती।
रम्मपुरवा गांव के रामनिवास, बृजेश, इंद्रपाल आदि कहने लगे कि किसान जो इतना कष्ट झेलकर भी मुस्कराता रहता है। वरना सरकारी कर्मचारियों को देख लीजिए, जरा सा संकट आ जाता है तो हड़ताल पर बैठ जाते हैं। किसान तो हड़ताल भी नहीं कर सकता।
फोटो-13- रात में आग तापते किसान राम निवास,राजेश, इंद्रपाल- फोटो : HARDOI
फोटो-14- करनपुरवा में घने कोहरे में खेतों में जाता किसान मिहीलाल- फोटो : HARDOI
फोटो-15- रात में बुझी आग से वचाव का प्रयास करता किसान सर्वेश- फोटो : HARDOI