हरदोई। जिले के छह खंड विकास अधिकारियों ने जिलाधिकारी के निर्देशों को भी धता बता दिया। डीएम के रोक लगाए जाने के बावजूद छह विकास खंडों में खंड विकास अधिकारियों ने मनरेगा के सामग्री अंश पर लगभग 12 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया।
मनरेगा के तहत कराए जाने वाले कार्याें का भुगतान दो अंशों में किया जाता है। मजदूरों का भुगतान श्रमांश के तौर पर किया जाता है, जबकि निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का भुगतान सामग्री अंश पर किया जाता है। मनरेगा के तहत स्पष्ट प्रावधान है कि 60 फीसदी बजट मजदूरी अंश पर खर्च किया जाएगा और 40 फीसदी बजट सामग्री अंश पर खर्च किया जाएगा।
अनुपात बिगड़ने पर भुगतान करने वाले के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी मनरेगा एक्ट में है। गत वित्तीय वर्ष यानी 2022-23 में जनपद के पांच विकास खंडों में श्रम-सामग्री का अनुपात बुरी तरह गड़बड़ा गया था। मामला संज्ञान में आने पर डीएम एमपी सिंह ने बीती एक जून को सुरसा, बावन, टड़ियावां, सांडी, हरपालपुर और भरखनी के सामग्री अंश के लंबित भुगतान पर रोक लगा दी थी। इन विकास खंडों के कुल 22 करोड़ 74 लाख 91 हजार रुपये के भुगतान पर रोक लगाई गई थी।
इसके बावजूद संबंधित विकास खंडों के खंड विकास अधिकारियों ने डीएम के निर्देशों की अनदेखी कर जुलाई और अगस्त में 11 करोड़ 94 लाख 87 हजार रुपये का भुगतान कर दिया। खास बात ताे यह है कि भुगतान के बारे में डीएम को कोई जानकारी ही नहीं दी गई। खंड विकास अधिकारियों ने मनरेगा के कार्यक्रम अधिकारी की हैसियत से डीएम की रोक के बाद भी भुगतान कर दिया। जितना भुगतान रोका गया था उसके सापेक्ष 57 फीसदी भुगतान कर दिया गया।
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सुरसा और बावन के तत्कालीन अफसरों ने दिखाया दम
डीएम ने पांच विकास खंडों के भुगतान पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद भुगतान करने में सुरसा और बावन के तत्कालीन कार्यक्रम अधिकारियों (बीडीओ) ने डीएम के निर्देशों की परवाह नहीं की। सुरसा में 3,74,05,000 के भुगतान पर रोक लगाई थी, लेकिन तत्कालीन बीडीओ ने 99 फीसदी भुगतान कर दिया। यहां रोक लगी रही और 3,73,16,000 का भुगतान हो गया। इसी तरह बावन में 1,10,73,000 रुपये के भुगतान पर रोक लगाई गई थी, लेकिन इसके बावजूद 91,75,000 रुपये का भुगतान कर दिया गया।
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सांडी और भरखनी में भी हो गया खेल
सांडी में डीएम ने 1,77,70,000 रुपये के भुगतान पर रोक लगाई थी। रोक के बावजूद यहां के अफसरों ने 1,22,65,000 रुपये का भुगतान कर दिया। इसी तरह भरखनी में डीएम ने आठ करोड़ 11 हजार रुपये के भुगतान पर रोक लगाई थी। रोक लगी रह गई, लेकिन 4,76,89,000 रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसी तरह टड़ियावां विकास खंड में 4,38,96,000 रुपये के भुगतान पर डीएम ने रोक लगाई थी, लेकिन मातहतों ने 1,77,5000 रुपये का भुगतान कर डाला। हरपालपुर में 3,73,36,000 रुपये के भुगतान पर रोक लगी थी, लेकिन यहां भी 22,67,000 हजार रुपये का भुगतान कर दिया गया।
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15 दिन में करना था सत्यापन, 96 दिन में भी नहीं कर पाए
डीएम एमपी सिंह ने जब एक जून को श्रम सामग्री अनुपात बिगड़ने पर छह विकास खंडों के मनरेगा के सामग्री अंश के भुगतान पर रोक लगाई थी, तो सीडीओ को निर्देश दिए थे कि लंबित बिलों और इनसे कराए गए कार्याें का सत्यापन करा लें। सीडीओ सौम्या गुरुरानी ने छह जुलाई को दो टीमें गठित कीं।
दोनों टीमों को तीन-तीन ब्लाॅकों की जिम्मेदारी दी गई। जिला विकास अधिकारी और लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता को सुरसा, बावन और टड़ियावां की जिम्मेदारी दी गई थी। इसी तरह ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के सहायक अभियंता को भरखनी, सांडी और हरपालपुर की जिम्मेदारी दी गई थी। 15 दिन में सीडीओ ने आख्या मांगी थी, लेकिन 96 दिन बाद भी सत्यापन शुरू ही नहीं हुआ।
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