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बेटे ने दोस्त संग मिलकर की थी पिता की हत्या

Sun, 10 Dec 2017 11:02 PM IST
हरदाेई
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जानकारी देते एसपी विपिन कुमार मिश्र और हत्यारोपियों के साथ पुलिस टीम। - फोटो : अमर उजाला
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हरपालपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम खसौरा में हुई अधेड़ की हत्या उसके पुत्र ने ही की थी। हत्यारोपी का कहना है कि पिता के खेती बेचकर रुपये खर्च करने से नाराज होकर उसने दोस्त के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया है। 
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हरपालपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम खसौरा निवासी राकेश (50) पुत्र रामदास का शव गत चार दिसंबर की सुबह गांव के बाहर स्थित उसके बाग में चारपाई पर पड़ा मिला था। धारदार हथियार से गला काटकर उसकी हत्या की गई थी। पुत्र रंजीत उर्फ जीतू ने अज्ञात के विरुद्ध हत्या की रिपोर्ट हरपालपुर कोतवाली में दर्ज कराई थी। रविवार को पुलिस अधीक्षक विपिन कुमार मिश्र ने अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी निधि सोनकर और क्षेत्राधिकारी हरपालपुर रविंद्र सिंह के साथ पत्रकार वार्ता में बताया कि राकेश की हत्या उसके पुत्र रंजीत उर्फ जीतू ने की थी। रंजीत ने बताया कि पिता 15 बीघा भूमि टुकड़ों में बेचने के बाद रुपये उड़ा रहा था। गांव में उसने एक व्यक्ति से लगभग चार बीघा भूमि और बेचने के लिए सौदा किया। इसकी जानकारी रंजीत को हुई तो उसने विरोध किया। लेकिन राकेश ने खेत बेचने की बात कही। इससे नाराज होकर रंजीत ने दोस्त बिलग्राम कोतवाली क्षेत्र के सांपखेड़ा निवासी आशीष सिंह पुत्र संतराम सिंह के साथ मिलकर बांके से गला काटकर पिता की हत्या कर दी। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल बांका भी बरामद किया है। एसपी ने घटना का खुलासा करने वाली टीम को पांच हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है। खुलासा करने वाली टीम में हरपालपुर के प्रभारी निरीक्षक बृजेंद्र नाथ शुक्ल, उपनिरीक्षक रामसेवक, सिपाही वसीम अहमद, अनुज पाल, वीरेंद्र सिंह और इरफान खान शामिल हैं। 

बनना था फौजी, बन गया कातिल 
गांव के लोगों के अनुसार रंजीत उर्फ जीतू फौज में भर्ती होना चाहता था। इसके लिए वह रोज अभ्यास भी करता था। उसे सफल होने का पूरा भरोसा था।  प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस अधीक्षक ने बताया कि रंजीत ने तैयारियों के लिए भी राकेश से रुपये मांगे थे लेकिन उसने इनकार कर दिया था। इससे भी रंजीत काफी आहत था। जो युवक फौजी बनना चाहता था वह पिता का कातिल बन गया। वहीं विवेचना के दौरान पुलिस को पता चला कि राकेश की परिवार से नहीं बनती है। पत्नी, एक विवाहित पुत्री और दो अविवाहित पुत्रों से अलग राकेश गांव के बाग में ही ज्यादातर समय बिताता था। हत्यारोपी रंजीत ने बताया कि इकलौती बहन की शादी करने के लिए भी राकेश ने रुपये नहीं दिए थे। उसने अपने मामा व कुछ अन्य रिश्तेदारों से रुपये उधार लेकर बहन की शादी की थी।
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