छह साल पहले संडीला के आटामऊ गांव में हुई युवक की हत्या के मामले में एडीजे द्वितीय की कोर्ट ने मंगलवार को युवती सहित छह लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोषियों पर 27-27 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। अभियोजन पक्ष के वकील बजरंग बहादुर सिंह के अनुसार संडीला थाना क्षेत्र के सराय मारूकपुर निवासी रामू पुत्र गंगू का शव संदिग्ध हालात में फांसी पर लटका मिला था। गंगू की तहरीर पर संडीला कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की तो उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद आठ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
तहरीर में गंगू ने आरोप लगाया था कि उसका बेटा रामू चाचा चेतराम के गांव आटामऊ गया था। 23 सितंबर 2010 शाम 5 बजे रामू आटामऊ के श्रीकृष्ण की पुत्री सुनीता से बात कर रहा था। दोनों को बात करते गांव के युवक साधू ने देख लिया था। आरोप है कि उसने रामू के साथ गाली गलौज कर देख लेने की धमकी दी थी।
24 सितंबर को श्रीकृष्ण का पौत्र रामू को शाम करीब सात बजे अपने घर खाना खिलाने ले गया था। बाद में रामू का शव श्रीकृष्ण की कोठरी में फांसी पर लटका मिला था। गंगू का आरोप था कि श्रीकृष्ण भाई प्रेम, बेटी सुनीता, श्रीकृष्ण के पौत्र और परिवार के गुरुदेव, श्यामू, मुरली, बंशीलाल व साधू ने हत्या कर रामू की लाश फांसी पर लटका दी। पुलिस की विवेचना में साधू का हत्या में हाथ नहीं पाया गया।
पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ चार्टशीट पेश की। इसमें नाबालिग होने के कारण श्रीकृष्ण के पौत्र का मुकदमा किशोर न्यायालय ट्रांसफर कर दिया गया। छह लोगों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई एडीजे द्वितीय जयप्रकाश पांडे की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष के वकील के तर्कों और साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने सभी छह लोगों को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा और 27-27 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।