फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तो फांसी लगाकर दी थी बंदी ने जान

विज्ञापन
विज्ञापन
हरदोई। जिला कारागार में निरुद्ध बंदी की मौत फांसी लगाने से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। मामले में न्यायिक जांच की संस्तुति की गई है। वहीं जेल अधीक्षक ने मामले में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध जांच कर कार्रवाई करने की बात कही है। पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया है।
विज्ञापन

जिला कारागार में निरुद्ध सुरेंद्र (45) पुत्र परमू निवासी देवियापुर थाना माधौगंज सोमवार को जिला कारागार के बैंरक नंबर आठ के शौचालय में औंधे मुंह पड़ा मिला था। उसका गमछा शौचालय की खिड़की पर और पास में चप्पल पड़ी थीं। शौचालय की सिटकिनी बंद थी। उसे तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया था। जहां पर चिकित्सक ने सुरेंद्र को मृत घोषित कर दिया। मंगलवार को पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाया। सूत्रों के अनुसार सुरेंद्र की मौत फांसी लगाने से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट है उसके सिर पर जो चोट थी, उससे उसकी मौत नहीं हो सकती। मृतक की पत्नी रूपाना ने बताया कि 17 मई 2017 को उसके पति के विरुद्ध गांव निवासी एक महिला ने पुत्री के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा तहरीर दी थी। जिस पर पुलिस ने 27 मई 2017 को उसके पति को गिरफ्तार कर लिया था और उसे 28 मई 2017 को जेल भेज दिया था। उसके तीन पुत्र और पांच पुत्रियां हैं। रूपाना ने जेल प्रशासन पर उसके पति को लटका देने का आरोप लगाया। उसने बताया कि वह सोमवार को पति से मिलने गई थी, तब वह ठीक थे। उन्होंने बुधवार को दोबारा बुलाया था। जेल अधीक्षक ब्रजेंद्र सिंह ने बताया कि बंदी दुष्कर्म और पाक्सो एक्ट के मामले में जिला कारागार में था। वह मानसिक रूप से परेशान रहता था। इसलिए उसका जनवरी में 15 दिन जिला कारागार के अस्पताल में इलाज भी कराया गया था। उन्होंने बताया कि इस मामले की न्यायिक जांच के लिए जिला जज को लिखा गया है। इसके अलावा वह भी इसकी जांच करेंगे। अगर किसी भी कर्मचारी की लापरवाही मिलती है तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें