संडीला। भूमि हथियाने के लिए दो भाइयों को मृत दिखा दिया गया। दोनों ने तहसीलदार कोर्ट में मुकदमा दायर कर अपने को जिंदा बताया। भाइयों के पक्ष में फैसला होने पर विपक्षी ने एसडीएम, मंडलायुक्त और राजस्व परिषद की कोर्ट में अपील कर दी। इस कारण मुकदमा चलता रहा। इन दोनों को खुद को जीवित बताकर जमीन हासिल करने में 27 साल लग गए।
कछौना थाना क्षेत्र के बाण गांव निवासी दो सगे भाइयों बिलास व श्यामलाल को मृत दिखा कर गांव के एक दबंग ने खुद को इन दोनों के पिता गज्जू का सगा भांजा बताकर 1995 में जमीन की वरासत करा ली थी। बिलास व श्यामलाल को 14 वर्ष बाद इस फर्जीवाड़े का पता चला। दोनों ने तहसीलदार के न्यायालय में मुकदमा दायर किया। 20 अक्टूबर 2009 को उच्च अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया कि वे जीवित हैं। उन्हें मृत दिखाकर एक व्यक्ति ने गलत तरीके से जमीन अपने नाम दर्ज करा ली है। लेखपाल व कानूनगो ने जांच कर रिपोर्ट दी कि बिलास व श्यामलाल जीवित हैं।
तहसीलदार ने 23 सितंबर 2014 को अपनी रिपोर्ट एसडीएम को प्रस्तुत कर दी। तत्कालीन लेखपाल के विरुद्ध कोतवाली संडीला में धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया गया। इसके बाद एसडीएम ने 15 अक्तूबर 2014 को बिलास व श्यामलाल को जीवित मानते हुए अभिलेखों में दूसरे पक्ष के स्थान पर इनके नाम दर्ज करने के आदेश दे दिए। खतौनी पर बिलास व श्यामलाल के नाम दर्ज हो गए लेकिन दूसरे पक्ष ने एसडीएम के आदेश को मंडलायुक्त की अदालत में चुनौती दे दी। इसके बाद मामला राजस्व परिषद तक गया।
राजस्व परिषद ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पुन: सुनवाई के लिए एसडीएम की अदालत में पत्रावली भेज दी। एसडीएम ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलील को सुनने के बाद बिलास व श्यामलाल को सही ठहराते हुए पूर्व अधिकारी के 15 अक्तूबर 2014 के आदेश की पुष्टि की। उसे यथावत रखे जाने का आदेश 26 सितंबर को पारित कर दिया। अब बिलास व श्यामलाल ने सोमवार को एसडीएम की अदालत में 26 सितंबर के आदेश को खतौनी में दर्ज किए जाने के लिए प्रर्थना पत्र दिया है।