कई लोगों से ले रखा था उधार
प्रधानपति रामकिशोर ने बताया कि शैलेंद्र काफी गरीब था। मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करता था। बच्चे भी बीमार रहते थे। इलाज के लिए लोगों काफी कर्ज भी ले चुका था। जिससे भी परेशान रहता था।
बरसात में पानी डूब गया था खेत
शैलेंद्र के पिता दयाराम के नाम भैंसटा नदी के किनारे डेढ़ बीघा खेत है। जिसमें मनोहर, शैलेंद्र व रामसुमिरन हिस्सेदार हैं। वहीं बरसात में खेत पानी में डूब गया था। शैलेंद्र के पास राशन कार्ड तक नहीं था।