आपत्तियों के पेंच में फंस गया सीमा विस्तार, अब पांच साल करिए इंतजार
- शहर से लगे गांवों के हजारों मतदाताओं को झटका
- छह माह पहले शासन ने शहर विस्तार को दी थी स्वीकृति
- अंतिम अधिसूचना नहीं हो सकी प्रकाशित आ रहा चुनाव
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। तीन माह बाद एक बार फिर निकाय चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मतदाता सूची का पुनरीक्षण चल रहा है। आपत्तियों के निस्तारण होने और मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के साथ ही चुनाव होना लगभग तय माना जा रहा है।
छह माह पहले शासन ने नगर पालिका के विस्तार प्रस्ताव को स्वीकृति दी थी। इसके बाद अधिसूचना प्रकाशित कर आपत्तियों को मांगा गया था। आपत्तियों के पेंच में फंसा विस्तार प्रस्ताव फंसा ही रह गया। पिछड़ा वर्ग आरक्षण मसले पर आगे बढ़े निकाय चुनाव को लेकर जब आपत्तियों को निस्तारित के लिए जिला प्रशासन ने तेजी दिखाई तो लगा कि शायद चुनाव से पहले प्रस्तावित क्षेत्र के मतदाता निकाय चुनाव में वोट कर सकेंगे। फिलहाल अब यह मामला प्रस्ताव तक सिमट कर रह गया है। विस्तार को लेकर अंतिम अधिसूचना प्रकाशित न होने से लोगों में खासी निराशा है।
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शहर के सीमा विस्तार के लिए प्रकाशित हुई थी अधिसूचना
हरदोई। सितंबर 2022 में शासन ने हरदोई शहर सीमा विस्तार को स्वीकृति दी थी। सीमा विस्तार में शहर से सटे आजाद नगर, महोलिया शिवपार, रामनगर आंशिक, धियर महोलिया, अनंग बेहटा आंशिक, नानकगंज ग्रंट, बहलोली आंशिक व बेहटा चांद आदि क्षेत्रों का शामिल किया गया। शहर की सीमा नौ वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 20.5 वर्ग किलोमीटर किए जाने को स्वीकृति दी गई थी। इसके लिए अधिसूचना प्रकाशित कर आपत्तियां मांगी गई थी।
विस्तार में 26 से बढ़कर 35 होते वार्ड
हरदोई। निकाय चुनाव आगे बढ़ने के बाद नगर पालिका ने 1620 आपत्तियों का निस्तारण करके फाइल प्रशासन को भेजी थी। यह वो आपत्तियां थी जो कि अधिसूचना प्रकाशित होने के बाद लगाई गई थीं। नगर पालिका की ओर से 26 से बढ़ाकर 35 वार्ड किए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। इससे सवा लाख मतदाताओं से बढ़कर पौने दो लाख मतदाता हो जाते।
सीमा विस्तार होने पर बदल जाता राजनीतिक परिदृश्य
हरदोई। शहर के जानकारों की मानें तो पिछले 20 सालों से नगर पालिका के विस्तार को लेकर लगातार अड़चन डाली जाती रही है। कुछ लोगों को डर है कि यदि सीमा विस्तार हो गया, तो आरक्षण की स्थित बदलने के साथ ही राजनीतिक परिदृश्य बदल सकता है। इसी कारण से शहर के सीमा विस्तार में लगातार रुकावटें डाली जाती रही हैं। लोग दबी जुबान से बता रहे हैं कि शाहाबाद के सीमा विस्तार की स्वीकृति जितनी तेजी के साथ हुई उसी तरह यहां भी विस्तार हो सकता था, लेकिन नहीं हो सका। इस कारण शहर से सटी लगभग एक लाख से अधिक आबादी को नगरीय सुविधाओं के लिए फिलहाल अभी पांच साल और इंतजार करना पड़ेगा।