हरदोई। हौसले अगर बुलंद हों तो कोई काम मुश्किल नहीं होता... इन लाइनों को कछौना क्षेत्र के सेमरा खुर्द निवासी रामजीवन चरित्रार्थ करते दिखते हैं। वह मछली पालन के साथ ही कमल की खेती कर आत्मनिर्भर बनने के साथ ही परिवार में आर्थिक समृद्धि लाएं हैं।
कछौना क्षेत्र के महरी के मजरा सेमरा खुर्द निवासी रामजीवन वैसे तो पारंपरिक खेती-किसानी कर अपना व परिवार का पालन-पोषण करते थे लेकिन, इसमें उनके मन मुताबिक आमदनी नहीं हो रही थी। इस पर कुछ अलग करने की मन मे ठानी और समिति बनाई। समिति के माध्यम से मछली पालन व कमल की खेती कर फूल व मखाना उत्पादन का सपना संजोया। मेहनत और लगन से इसे साकार कर क्षेत्र में एक अलग पहचान बना ली है। रामजीवन स्वयं को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाने के साथ ही क्षेत्र के किसानों को गांव में रोजगार मुहैया कराने में लगे हैं। रामजीवन ने बताया कि वर्ष 2010 में मत्स्य जीवी सहकारी समिति महरी समसपुर के नाम से गठित की। इसके बाद समसपुर के गौरेला तालाब का आवंटन कराया। 27 लोगों के साथ मछली पालन शुरू किया। तालाब की भूमि करीब पांच हेक्टेयर है। टीम के सहयोग से तालाब की बाउंड्री की और परंपरागत खेती से हटकर नए तरीके से मछली पालन शुरू किया।
बताया कि इसी तालाब में कुदरती तौर पर कमल के पौधे उग रहे थे, इन फूलों को सुरक्षित व संरक्षित किया। कमल के फूल के बाद बीज तैयार होते हैं और इनको तोड़कर मखाना का उत्पादन शुरू किया। मखाना का बाजार में अच्छा मूल्य मिलने लगा, इससे पूरी टीम में उत्साह का संचार हुआ। आर्थिक लाभ अच्छा मिलने पर टीम ने गंभीरता से काम करना शुरू किया और परिणाम सामने आए।
पोषक तत्वों से भरपूर होता है मखाना व कमल ककड़ी
मखाना में कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, फास्फोरस पोषक आदि मानव शरीर के लिए जरूरी तत्व पाए जाते हैं। यह एंटीऑक्सीडेंट से समृद्ध होता है। साथ ही कमल ककड़ी की भी बाजार में सब्जी के रूप में अच्छी मांग रहती है। कमल के फूल की खेती से मछलियों के उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई और मछलियों की सुरक्षा भी होने लगी। मछलियों के भोजन की भी कमल के फूल, पत्ते व बीज से व्यवस्था हो जाती है। किसान दिवस पर जिलाधिकारी की ओर से प्रति हेक्टेयर 40 क्विंटल मछली उत्पादन पर प्रगतिशील किसान के तौर पर रामजीवन को पुरस्कृत भी किया जा चुका है। रामजीवन ने बताया कि कमल की खेती से क्षेत्र का पर्यावरण व भू-जल अच्छा रहता है। हमेशा जलभराव व हरियाली के कारण दूर-दूर से पक्षी आते हैं।