हरदोई। जॉब कार्डधारकों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी देने वाली मनरेगा में श्रम और सामग्री अनुपात में खूब मनमानी और गड़बड़ी की गई है। छह विकास खंडों में श्रम सामग्री मद में 26.64 करोड़ का विचलन पाया गया है। इसमें से अभी 22.74 करोड़ रुपये के भुगतान पर डीएम ने रोक लगा दी है। कार्यों और अभिलेखों की जांच के भी आदेश दिए हैं।
मनरेगा में परियोजना लागत का अधिकतम 40 प्रतिशत सामग्री अंश पर खर्च किए जाने की व्यवस्था है। वहीं श्रम अंश पर कम से कम 60 प्रतिशत खर्च की अनिवार्यता दी गई है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में कराए गए कार्यों, कार्ययोजना की लागत, भुगतान के लिए लगाए फंड ट्रांसफर ऑर्डर के परीक्षण में श्रम और सामग्री अंश में छह विकास खंडों में बड़ी मात्रा में विचलन पाया गया। (संवाद)
ब्लॉकवार विवरण के परीक्षण के बाद छह ब्लॉकों में सामग्री मद में भुगतान के लिए शेष 22 करोड़ 74 लाख 91 हजार रुपये के भुगतान पर रोक लगा दी है। उन्होंने अपर जिला कार्यक्रम समन्वयक सीडीओ को कार्यों की स्थालीय, तकनीकी और अभिलेखों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। ग्राम पंचायतों में कराए गए कार्यों की जांच के आदेश श्रम रोजगार उपायुक्त को दिए हैं।
मंगला प्रसाद सिंह, जिला कार्यक्रम समन्वयक
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इन विकास खंडों में लगाई गई भुगतान पर रोक
विकास खंड - भुगतान पर रोक - विचलन की राशि (लाख रुपये में)
बावन - 110.73 - 115.83
भरखनी - 800.11 - 355.82
हरपालपुर - 373.36 - 622.74
सांडी - 177.70 - 157.39
सुरसा - 374.05 - 1055.27
टड़ियावां - 438.96 - 357.81
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इन अधिकारियों को जारी हुए कारण बताओ नोटिस
डीएम एमपी सिंह ने बताया कि मनरेगा में श्रम व सामग्री अंश में मनमानी और अनदेखी के लिए विकास खंड बावन की कार्यक्रम अधिकारी रचना गुप्ता, भरखनी के कार्यक्रम अधिकारी अखिलेश प्रताप सिंह, हरपालपुर की कार्यक्रम अधिकारी शैलबाला श्रीवास्तव, सांडी के कार्यक्रम अधिकारी विजय नारायण राजपूत, सुरसा के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रामप्रकाश व टड़ियावां के कार्यक्रम अधिकारी नरोत्तम कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। बताया कि पांच बिंदुओं पर साक्ष्य सहित जवाब मांगे गए हैं।