हरपालपुर। छुट्टा मवेशियों को संरक्षित करने के लिए स्थाई और अस्थाई गोआश्रय स्थल बनाने का कार्य न सिर्फ शासन बल्कि डीएम की भी प्राथमिकता में है। इतनी प्राथमिकता वाले कार्यों में भी खंड विकास अधिकारी जमकर लापरवाही कर रहे हैं। हरपालपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत मुर्चा रामनगर में गोशाला का निर्माण होने के दौरान खंड विकास अधिकारी ने मौके का निरीक्षण एक बार भी नहीं किया।
नतीजा यह हुआ कि ग्राम समाज की भूमि में स्थापित कुछ रसूखदारों के पिपरमेंट प्लांट भी गोशाला की चहार दीवारी के अंदर कर लिए गए। अमर उजाला ने इस पर सवाल उठाया, तो बीडीओ जानकारी न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रही हैं।
मुर्चा रामनगर में 25 लाख रुपये की लागत से गोशाला का निर्माण कराया गया है। निर्माण कार्य के दौरान जिम्मेदारों ने मौके का जायजा ही नहीं लिया। जिस स्थान पर गोशाला का निर्माण कराया गया वहां ग्राम समाज की भूमि पर गांव के दो रसूखदार लोगों ने पहले से ही पिपरमेंट पेराई के प्लांट लगा रखे हैं। गोशाला का निर्माण हुआ तो इन दोनों प्लांट को भी परिधि के अंदर ले लिया गया।
ऐसे में यहां मवेशियों की देखरेख में भी लगातार लापरवाही हो रही है। खंड विकास अधिकारी शैलबाला से इस बारे से बात की गई तो उन्होंने कहा कि किसी ने बताया ही नहीं कि पिपरमेंट के प्लांट भी वहीं लगे हैं। जब सवाल हुआ कि भूमि चयन और निर्माण कार्य के दौरान एक बार भी खुद नहीं गईं, तो उन्होंने चुप्पी साध ली। इससे यह भी स्पष्ट हो रहा है कि आश्रयस्थल का अधिकारी कागजी निरीक्षण करते रहे। स्थलीय निरीक्षण करते तो, शायद नजर भी पड़ जाती।