हरदोई। बिलग्राम-रहुला-जफरपुर मार्ग पर गनीपुर गांव में गहा नाले पर बने पुल के गिर जाने के मामले में लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं को जिम्मेदार माना गया है। संबंधित क्षेत्र के सहायक अभियंता (एई) को शासन ने निलंबित कर दिया है।
लोक निर्माण विभाग के खंड दो के अधिशासी अभियंता और उन्नाव के अधीक्षण अभियंता के खिलाफ भी जांच के आदेश शासन ने दिए हैं। शासन स्तर से हुई इस कार्रवाई से पूरे विभाग में खलबली मच गई है।
बिलग्राम-रहुला-जफरपुर मार्ग पर गहा नाले पर तकरीबन चार दशक पुराना पुल आवागमन के लिए बना हुआ था। कई वर्ष से पुल जर्जर होने के बावजूद इस पर आवागमन बंद नहीं किया गया था। पांच जनवरी को मौरंग भरा डंपर इस पुल से निकल रहा था, तभी पुल का पिलर नंबर सात ढह गया था और डंपर अटक गया था। यह घटना पांच जनवरी को हुई थी और छह जनवरी को लोक निर्माण विभाग के मंत्री जितिन प्रसाद को हरदोई में एक लोकार्पण कार्यक्रम में आना था।
घटना के बाद वह कार्यक्रम में भी नहीं आए थे। पूरे मामले में डीएम एमपी सिंह ने जांच कराई थी और विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी थी। पूरे प्रकरण में शासन ने पुल गिरने के मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में निर्माण खंड दो के सहायक अभियंता अनुराग मौर्या को निलंबित कर दिया है।
निलंबन के दौरान उन्हें प्रमुख अभियंता कार्यालय से संबद्ध किया गया है। मामले की विस्तृत जांच राष्ट्रीय राजमार्ग के मुख्य अभियंता को सौंपी गई है। साथ ही अधीक्षण अभियंता उन्नाव सुभाष चंद्र और निर्माण खंड दो के अधिशासी अभियंता ब्रजेश कुमार दीपक के खिलाफ भी अनुशासनिक कार्रवाई के निर्देश शासन ने दिए हैं।
सिंचाई विभाग पर ठीकरा फोड़ने की थी कोशिश
घटना के फौरन बाद ही लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं ने पुल गिरने और इसका रख रखाव न करने का ठीकरा सिंचाई विभाग के अभियंताओं पर फोड़ने की कवायद शुरू कर दी थी। निर्माण खंड दो के अभियंताओं ने पुल को अपना मानने से ही इनकार कर दिया था और इसे सिंचाई विभाग का पुल बताया था। इसके बाद डीएम ने पूरे मामले पर सीडीओ सौम्या गुरुरानी से भी जांच कराई थी। इस जांच में पता चला था कि उक्त सड़क लोक निर्माण विभाग के खंड दो के अधीन है और इस पर पड़ने वाले सभी पुल पुलियों की मरम्मत की जिम्मेदारी भी विभागीय अभियंताओं की है।