बेहंदर। महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। बेहंदर क्षेत्र की रूबी नाज और छवि कश्यप ने चुनौतियों को स्वीकार कर आत्मनिर्भरता की मंजिल हासिल की है। संघर्षों के बीच छोटे स्तर पर काम शुरू करके आज न केवल वे खुद आत्मनिर्भर बनीं हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार से देकर स्वावलंबी बनाने काम कर रहीं हैं। इंशाल्लाह स्वयं सहायता समूह की सचिव रूबी नाज के कामों को प्रदेश स्तर तक पहचान मिली है। राज्यपाल व मुख्यमंत्री से सम्मानित भी हो चुकी हैं। वहीं छवि कश्यप भी जहां दूसरों के घर में चूल्हा चौका कर रहीं थी आज वो खुद का सिलाई प्रशिक्षण केंद्र चला रहीं हैं।
रूबी नाज आर्थिक रूप से कमजोर थी। चार साल पहले 1.25 लाख रुपये से अपने कारोबार की शुरुआत की और अब कारोबार करोड़ों में पहुंच गया है। वह मनरेगा के लिए सिटीजन इंफोर्मेशन बोर्ड सीआईबी बनाने का काम करतीं हैं। एक बोर्ड का उन्हें 3600 से 5500 मिलते हैं।
समूह से प्रशिक्षण
ऐसे ही ब्लॉक के गांव अकबरपुर ताल्हू की रहने वाली छवि कश्यप ने तो, स्वयं के साथ ही दूसरों के लिए भी आत्मनिर्भरता की राह खोली है। कभी लोगों के घरों में चौका-बर्तन तक सीमित रहने वाली छवि ने आत्मनिर्भर बनने की ठानी तो सफलता भी पाकर दिखा दी। छवि ने तीन साल पहले सिलाई का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद सिलाई प्रशिक्षण सेंटर खोला।
महिलाओं व किशोरियों को सिलाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें हुनरमंद बनाने के साथ ही आत्मनिर्भरता की राह दिखा रहीं है। इस काम से उन्हें प्रतिमाह औसतन पांच-छह हजार की आमदनी कर रही हैं। छवि कश्यप अब तक 30 महिलाओं को रोजगार भी मुहैया करा कर उन्हें समाज में आत्मनिर्भरता का रास्ता दिखा रहीं हैं।