हरदोई। सख्त रास्तों में भी आसान सफर लगता है, यह मुझे मां की दुआओं का असर लगता है। एक मुद्दत से मेरी मां नहीं सोई, जब मैने एक बार कहा था, मां मुझे डर लगता है...। कुछ ऐसी ही वेदना उनके जेहन में कौंधती है जिनके सिर पर मां का साया नहीं है या मां के प्यार से महरूम हैं। ऐसी नम आंखें हमेशा मां को तलाशती हैं। आज मदर्स डे है। इसकी पूर्व संध्या पर शहर में बच्चों व बड़ों ने बड़े ही मार्मिक अंदाज से मां का अर्थ बयां किया, जिससे बरबस ही आंखें झलक आईं। बुजुर्ग विजय बाजपेई का कहना है कि मां के बारे में कुछ कहना सूरज को दिए दिखाने के बराबर है। बस इतना समझ लीजिए कि एक बच्चा अपनी मां का ऋण आजीवन सेवा कर के भी नहीं चुका सकता है। मां दुलार का समंदर है जिसमें गोते लगाकर बच्चा बड़ा होता है, चलना सीखता है। मां का साया कितनी ही उम्र में उठ जाए तो वह अपने आप को अकेला महसूस करता है। मां के न रहने पर क्या गुजरती है आइए जानते हैं उनकी जुबानीं...।