सतेंद्र कुमार पांडेय
हरदोई। जनपद में स्वास्थ्य विभाग के अधीन तैनात 38 चिकित्सक लापता हैं। पिछले कई वर्ष से इन चिकित्सकों की तलाश महकमा कर रहा है, लेकिन तलाश अधूरी ही है। दरअसल स्वास्थ्य विभाग के अधीन तैनात यह चिकित्सक इस्तीफा तो दे चुके हैं, लेकिन इनके इस्तीफे मंजूर नहीं हुए हैं। इस्तीफा मंजूर हुए बिना ही यह चिकित्सक प्राइवेट अस्पतालों में सेवाएं देने लगे हैं।
स्वास्थ्य विभाग में समय-समय पर चिकित्सकों की तैनाती की जाती है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि इन चिकित्सकों को सेवा में लेने के दौरान एक बांड भरवाया जाता है। अमूमन इसमें दो वर्ष से पहले सरकारी सेवा न छोड़ने का वादा रहता है, लेकिन बड़ी संख्या में चिकित्सक इस वादे को पूरा नहीं करते। वर्ष 2010 से अब तक 38 चिकित्सक ऐसे हैं जो लापता हैं। इन्होंने दो साल की सेवा की अवधि भी पूरी नहीं की।
इस्तीफा देकर चले गए और पलटकर यह भी पता नहीं किया कि इस्तीफा मंजूर भी हुआ है या नहीं। कई ऐसे चिकित्सक भी हैं जिन्होंने अपने वरिष्ठ जनों को न तो मौखिक सूचना दी और न ही लिखित सूचना और फिर भी लापता चल रहे हैं। अब स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे चिकित्सकों को चिन्हित करना शुरू कर दिया है। इतना जरूर है कि इन चिकित्सकों को वेतन नहीं दिया जा रहा है।
यह हैं बानगी
अहिरोरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत घनश्याम नगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डा. सुशील कुमार पिछले पांच माह से गैरहाजिर हैं। अधीक्षक डा. मनोज कुमार बताते हैं कि डा. सुशील ने कोई लिखित या मौखिक सूचना नहीं दी है। उनके घर नोटिस भेजी गई है। इसके अलावा डा. अनुज कटियार ने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ है। डा. अनुज कटियार कहते हैं कि वर्ष 2021 में ही इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा स्वीकार न होने की जानकारी नहीं है।
वर्जन
स्वास्थ्य विभाग से गायब डॉक्टरों की सूची तैयार की जा रही है। साथ ही ऐसे डॉक्टरों को भी सूची में शामिल किया गया है, जिन्होंने बिना अवधि पूरी किए ही इस्तीफा दिया है, लेकिन शासन ने उनका इस्तीफा स्वीकार नही किया है। ऐसे डाक्टर जो प्राइवेट अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं, उनकी सूची भी शासन को भेजी जाएगी।
डॉ. रोहताश कुमार, सीएमओ हरदोई