हापुड़। पांच लाख तक निशुल्क उपचार सेवा के लिए हाल ही में योजना में शामिल 3.10 लाख लोगों में 2.33 लाख कार्ड बनवाने नहीं पहुंचे हैं। डेढ़ महीने पहले पोर्टल पर इनके नाम आए थे, ऐसे में धार्मिक स्थल, स्कूल कॉलेजों से अपील की जा रही है। शासन की फटकार अधिकारियों पर अलग से पड़ रही है।
आयुष्मान योजना में पांच लाख तक का निशुल्क उपचार दिया जाना है। इसके लिए पैनल में 15 प्राइवेट अस्पताल भी शामिल हैं। मेडिकल कॉलेज तो योजना के तहत उपचार देने का प्रचार प्रसार भी खूब कर रहे हैं, लेकिन लोगों में जागरूकता नहीं है।
आलम यह है कि हाल ही में शासन ने ऐसे राशन कार्ड धारक जिनमें छह या इससे अधिक यूनिट हों उन्हें भी शामिल किया है। सीनियर सीटिजन भी योजना में शामिल हुए हैं। कुल 3.10 लाख लोगों का डाटा पोर्टल पर आया है जो नए सिरे से योजना में जुड़े हैं।
सितंबर महीने से ही इन लोगों के कार्ड बनाने का कार्य चल रहा है। लेकिन घर-घर भटकने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सिर्फ 87 हजार लोग ही मिल सके हैं, जिनके कार्ड बने हैं। 2.33 लाख लोग कार्ड बनवाने नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में बिना कार्ड उन्हें उपचार नहीं मिल सकेगा।
-
2.58 लाख पहले चरण में हो चुके हैं शामिल
योजना के शुरू होने पर 2.58 लाख लोगों की सूची स्वास्थ्य विभाग को मिली थी। इसमें 1.87 लाख लोगों के कार्ड बनाए जा चुके हैं। 14 हजार से अधिक मरीजों को योजना में उपचार भी दिलाया जा चुका है।
-ऐसे करें आवेदन-
बेनीफिशियरी डॉट एनएचए डॉट जीओवी डॉट इन वेबसाइट पर जाकर दाहिनी तरफ बॉक्स में बेनिफिशियरी विकल्प को टिक करके अपना मोबाइल नंबर डालें और वेरिफाई पर क्लिक करें। मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा, जिसे बॉक्स में दिए गए विकल्प पर अंकित करें, साथ ही दिए कैप्चा को डालकर लॉगिन करें। लॉगिन होने के बाद स्क्रीन में राज्य का नाम, योजना का नाम, अपने जिले का नाम चुने, सर्च बाई के विकल्प में प्रदर्शित फैमिली आईडी को चुने, इसके बाद फैमिली आईडी के विकल्प में राशन कार्ड संख्या डालें और बॉक्स में दाहिनी तरफ दिए आइकॉन को क्लिक करें।
-आयुष्मान योजना के पैनल में शामिल अस्पताल-
आयुष्मान सिंभावली, दीप हॉस्पिटल, देव नंदिनी अस्पताल, जीएस मेडिकल, मधु नर्सिंग होम, प्रयाग हॉस्पिटल, रामा मेडिकल, सरस्वती मेडिकल, श्री सिद्धि विनायक हॉस्पिटल।
-
जल्द बनवाएं आयुष्मान कार्ड-
3.10 लाख लोगों के नाम पोर्टल पर आए हैं, इसमें शामिल लोग जल्द अपने गोल्डन कार्ड बनवा लें। ताकि उन्हें अस्पतालों में निशुल्क उपचार सेवा मिल सके।डॉ.केपी सिंह, एसीएमओ।
-