गढ़मुक्तेश्वर। नगर में पशु अस्पताल के लिए कोई स्थाई जगह नहीं है, जिसके चलते करीब एक दशक से पशु अस्पताल नगर पालिका के सामुदायिक केंद्र में चल रहा है। जो वर्तमान में जर्जर स्थिति में है, पशु चिकित्सा अधिकारी समेत उनकी टीम जर्जर भवन में ही बैठने को मजबूर हैं।
गढ़ में उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय और अस्पताल के लिए अभी तक स्थाई भवन का निर्माण नहीं हो सका है। नगर पालिका परिषद द्वारा सन् 2003 में पुलिस चौकी के निकट सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया था। जिसका कुछ दिन आसपास के लोगों ने विभिन्न कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल किया, लेकिन इसके बाद भवन में पशु चिकित्सालय को शिफ्ट कर दिया गया। जिसे सामुदायिक भवन में चलते हुए करीब एक दशक का समय हो चुका है। जो आज भी उसी में चल रहा है। जिस सामुदायिक केंद्र में अस्थाई पशु अस्पताल चल रहा है, वह जर्जर स्थिति में है। पशुधन विभाग की टीम ने बताया कि बारिश के मौसम में लिंटर से पानी टपकने लगता है, इसके अलावा दीवारों से प्लास्टर भी झड़ रहा है। वहीं उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी तक के बैठने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिल पा रहा है। जिससे आंधी बारिश के दौरान हादसे का खतरा बना रहता है।
पशु अस्पताल में घायल अवस्था में पहुंचने वाले जंगली जानवरों को रखने और उसकी जांच के लिए कोई विशेष कक्ष नहीं है। साथ ही किसी भी तरह के स्टोर की सुविधा भी नहीं है। इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति अपने पशु को लेकर आता है, तो उसको बैठने तक की सुविधा मौजूद नहीं है।
उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रंजन सिंह ने बताया कि पशुओं के अस्पताल के लिए भूमि का आवंटन तो हुआ, लेकिन मामला न्यायालय में विचारधीन होने के कारण फिलहाल अस्पताल निर्माण का कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया है। न्यायालय के आदेश के बाद और उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पशु अस्पताल का निर्माण होना संभव है।