पिलखुवा। गांव आलमपुर में घोड़ा बिदकने के बाद बुग्गी समेत बच्चों को लेकर एक पानी से भरे गड्ढे में कूद गया। इससे बुग्गी सवार दो बच्चों की पानी में डूबने से मौत हो गई।
ग्राम आलमपुर में सोमवार की देर शाम घोड़ा बुग्गी में सवार होकर विशाल (12 ) पुत्र बब्बन, हर्ष (6) पुत्र जयभगवान, दीपांशु ( 7) पुत्र बिट्टू खेतों पर घास लेने गए थे। घास लेकर देर शाम लौटते समय अचानक घोड़ा बिदक गया। सभी को लेकर पानी से भरे गड्ढे में कूद गया। इससे बुग्गी में सवार विशाल और हर्ष की पानी में डूबने से मौत हो गई। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने सभी को बाहर निकाला और पिलखुवा स्थित एक निजी मेडिकल कालेज के अस्पताल में लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने विशाल और हर्ष को मृत घोषित कर दिया।
कड़ी मशक्कत के बाद गड्ढे से निकाले शव
ग्रामीणों ने बताया कि गड्ढा करीब 15 से 17 फुट गहरा है, बारिश होने पर उसमें पानी भर गया। गड्ढे में दलदल होने के कारण विशाल और हर्ष उसमें नीचे फंस गए। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत कर दलदल में फंसें दोनों के शवों को निकाला। जिसके बाद परिजनों ने बिना पोस्टमार्टम कराए शवों का अंतिम संस्कार किया।
भट्ठा संचालकों द्वारा खोदा गया गड्ढा
ग्रामीणों का कहना है कि नोएडा और गाजियाबाद के लोगों क गांव में ईंट भट्ठे हैं। भट्टा संचालकों द्वारा ईंट पाथने के लिए मिट्टी निकाल कर करीब 15 से 17 फुट गहरा गड्ढा खोदकर खुला छोड़ दिया गया, जिसमें बारिश आने पर पानी भर गया।
पहले भी हो चुकी है मजदूर के पुत्र की मौत
ग्रामीणों का कहना है कि करीब तीन साल पहले भट्ठे पर पर ईंट पाथने वाले मजदूर के पुत्र की गड्ढे में डूबकर मौत हो गई थी। हालांकि, यह वह गड्ढा नहीं था। मजदूर बाहर का रहने वाला था, जिसके बाद वह काम छोड़कर चला गया।
मृतक विशाल दो बहनों का इकलौता भाई
मृतक बच्चों के पिता मजदूरी करते है। सुंदर के इकलौता पुत्र विशाल के अलावा अंशिका और वंशिका दो पुत्री है। जबकि जयभगवान के पुत्र हर्ष के अलावा चार वर्षीय हिमांशु और डेढ़ साल की पुत्री सिया है।
कोट -
सीओ वरुण मिश्रा का कहना है कि मृतकों के परिजनों ने पोस्टमार्टम नहीं कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था, जिस पर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पीएम नहीं कराया गया। जिसके बाद उन्होंने शवों का अंतिम संस्कार कर दिया।