संवाद न्यूज एजेंसी
हापुड़। गन्ने की को-0238 प्रजाति में बीमारी और उत्पादन गिरने से इस फसल को गन्ने की चार नई प्रजातियों से विस्थापित कराया जा रहा है। क्षेत्र में पिछले सालों में जिन किसानों ने कुछ नई प्रजातियों को बोया है, उनकी पेड़ी को लेकर अब किसान संशय में हैं। क्योंकि पेड़ी सही तरीके से अंकुरित नहीं हो रही।
गन्ना उत्पादन किसान शिवकुमार त्यागी, नरेंद्र सहवाग, रजनीश त्यागी, धनवीर शास्त्री ने बताया कि खेत में पिछले साल ही को-15023 प्रजाति का गन्ना बोया था। पौधा गन्ना ठीक हुआ लेकिन, इसमें जंगली जानवरों का नुकसान इतना अधिक है कि 20 फीसदी तक गन्ने को चौपट कर दिया है। क्योंकि इस प्रजाति का गन्ना बेहद फोका और रिकवरी अधिक है। इस प्रजाति की पेड़ी उस तरह नहीं चल रही, जिस तरह को-0238 चलती थी।
उन्होंने बताया कि को-0118 प्रजाति के पौधे गन्ने का उत्पादन ठीक है, कोलक-14201 और कोषा 13235 प्रजाति का गन्ना पहली बार बो रहे हैं, जिसका परिणाम अगले कुछ सालों में आएगा। हालांकि कुछ किसानों ने इन दो प्रजातियों का गन्ना बोया है, जिसमें 13235 का उत्हादन अच्छा है।
जिला गन्ना अधिकारी सना आफरीन खान ने कहा कि गन्ने की को-0238 प्रजाति में काफी रोग लगने लगा है। इसे विस्थापित करने के लिए दूसरे नस्लों को प्राथमिकता दी जा रही है। किसानों को भी नई प्रजातियों से जागरूक कराया जा रहा है।