हापुड़। दिवाली के बाद हवा का प्रवाह थमते ही वातावरण में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है। दिवाली के बाद पिछले दो दिनों में प्रदूषण के स्तर में 222 अंकों का इजाफा हुआ है। मंगलवार सुबह को एक्यूआई 326 तक पहुंच गया। इससे आंखों में जलन और गले में खराश की समस्या बन गई। आतिशबाजी का खतरनाक धुआं अब असर दिखाने लगा है। सांस, हृदय रोगियों के साथ ही गर्भ में पल रहे शिशुओं की सेहत के लिए भी यह वातावरण नुकसानदायक है।
दिवाली के बाद हर साल जिले की हवा का स्वास्थ्य बिगड़ जाता है। रविवार को दिवाली में खूब आतिशबाजी छोड़ी गई, पाबंदी के बावजूद प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे जलाए गए। गंधक, पोटाश के मिश्रण से भी आतिशबाजी हुई, रातभर तेज हवा चलने के कारण प्रदूषण का स्तर वातावरण में नहीं बढ़ा। बुधवार सुबह हवा का वेग कम हुआ तो प्रदूषण ने जिले को जकड़ लिया। प्रदूषण आंकने वाले मापक (एक्यूआई) का सूचकांक 326 दर्ज किया गया। प्रदूषण विभाग व चिकित्सकों के अनुसार एक्यूआई का यह स्तर प्रदूषण की गंभीर श्रेणी में आता है, यह हवा सामान्य और स्वस्थ मनुष्यों के लिए भी बेहद खतरनाक है। सांस और हृदय रोगियों के लिए तो इस हवा में सांस लेना भी अच्छा नहीं है। इस साल जिले में पटाखों की बिक्री पर पूर्णत प्रतिबंध लगाया गया था। ग्रैप की भी काफी सख्ती रही, इसके बावजूद प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया।
दो दिन प्रदूषण स्तर में आया था सुधार
प्रदूषण को रोकने के लिए अधिकारियों द्वारा प्रयास किए गए थे। हवा और बारिश ने भी साथ दिया जिसके बाद प्रदूषण का स्तर दिवाली से एक दिन पहले गिरकर 104 तक पहुंच गया था। लेकिन आतिशबाजी के बाद प्रदूषण वातावरण में जहर घोल रहा है।
प्रदूषण संबंधी अंतरराष्ट्रीय मानक और प्रभाव-
-पीएम 2.5 एयर क्वालिटी इंडेक्स
* 0-60-उत्तम हवा, सुरक्षित
* 69-99-सामान्य
* 100-149-हल्का प्रदूषण, सांस के मरीजों के लिए सतर्कता जरूरी
* 150-200-बेहद प्रदूषित हवा सभी के लिए नुकसानदेह
* 201- 299-हर किसी के स्वास्थ्य के लिए बेहद गंभीर
* 300 से ज्यादा-अधिक हानिकारक, हृदय, लंग्स और ब्रेन के लिए खतरनाक
सांस और हृदय रोगियों के लिए खतरा
मौसम की इस मार से सांस रोगियों और आंखों के जलन के रोगी बढ़े हैं। हृदय रोगियों के अलावा नवजात बच्चों में भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है। मंगलवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 134 मरीज सांस, 23 हृदय रोग से पीड़ित पहुंचे। आंखों में जलन वालों की संख्या भी अच्छी खासी रही। जिसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विज्ञानी डा. अशोक कुमार ने बताया कि सोमवार रात हवा की रफ्तार कम होने के कारण सुबह सबसे अधिक प्रदूषण रहा। इस दौरान काफी धुंध भी रही। हालांकि इसके बाद प्रदूषण में कमी दर्ज की गई। सुबह की अपेक्षा शाम का एक्यूआई कम रहा।