धौलाना। म्यांमार से वर्ष 2012 और उसके बाद 2017 में पलायन कर धौलाना क्षेत्र के गांव शेखपुर खिचरा, पिपलैडा और औद्योगिक क्षेत्र में आए रोहिंग्या परिवारों की पहचान के लिए खुफिया विभाग और पुलिस ने जांच तेज कर दी है। हालांकि अभी इस मामले में कोई और गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन इन्हें चिन्हित करने का कार्य किया जा रहा है। अभी तक की जांच में पता चला है कि कुछ रोहिंग्याओं के पास मोबाइल फोन थे और वे निरंतर सरकारी राशन भी ले रहे थे। किन दस्तावेजों में इन्होंने सिम लिया और किस दस्तावेज के आधार पर ये लोग राशन ले रहे थे, इसकी जांच की जा रही है।
धौलाना क्षेत्र में रह रहे रोहिंग्याओं की जांच स्थानीय पुलिस और खुफिया विभाग ने तेज कर दी है। जांच की जा रही है कि गांव में किराए पर रहने वाले ऐसे कितने परिवार हैं जो अपनी पहचान छुपा कर अवैध तरीके से रह रहे हैं। रोहिंग्या के मददगार बने ऐसे लोग भी पुलिस की रडार पर हैं, जो बिना सत्यापन कराए और बिना सूचना दिए रोहिंग्या परिवारों को कई सालों से अपने यहां रखे हुए हैं। पकड़े गए रोहिंग्याओं पर मोबाइल फोन मिले हैं। इनके द्वारा राशन लिए जाने की भी जानकारी मिल रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक शेखपुर खिचरा में यह पता लगाना आसान नहीं है कि रोहिंग्या परिवारों की संख्या कितनी है। लेकिन बताया जा रहा है कि कुछ परिवार एटीएस के रडार पर हैं। इनकी जांच गोपनीय तरीके से हो रही है। पुलिस ने ऐसे लोगों के संपर्क में रहने वालों से पूछताछ कर रही है। ऐसे में इस मामले में इन लोगों पर और शिकंजा कसा जा सकता है।