हापुड़। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म करने के मामले में शुक्रवार को निर्णय सुनाया। जिसमें कोर्ट ने मामले के एक दोषी को दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए 12 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
विशेष लोक अभियोजक हरेंद्र त्यागी ने बताया कि हापुड़ नगर कोतवाली क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने कोतवाली में तहरीर दी। जिसमें उसने कहा कि 28 अगस्त 2015 उसकी 15 वर्षीय नाबालिग पुत्री घर में नीचे के कमरे में सोने के लिए कहकर आई। लेकिन सुबह देखा तो उनकी पुत्री कमरे में नहीं थी। जिसकी काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल पाया।
पुलिस ने फरमान पुत्र यामीन निवासी गांव खिचरा थाना धौलाना, आमिल पुत्र फोरस, भूरे पुत्र याकूब, रिजवान पुत्र कय्यूम व वसीम पुत्र मकसूद निवासी गांव देहरा, थाना धौलाना के खिलाफ पॉक्सो, दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और उसके आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए। जहां पर न्यायाधीश श्वेता दीक्षित ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद शुक्रवार को मामले में निर्णय सुनाया। जिसमें न्यायाधीश श्वेता दीक्षित ने आरोपी फरमान को दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए 12 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोषी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड जमा न करने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। साथ ही अर्थदंड की अस्सी प्रतिशत धनराशि पीड़िता को देने के लिए कहा है। वहीं, न्यायालय ने मामले के अन्य तीन आरोपी भूरे, रिजवान व वसीम को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
पीड़िता को एक लाख रुपये देने के आदेश-
न्यायाधीश ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को पुनर्वास के लिए एक लाख रुपये की प्रतिकार धनराशि देने के भी आदेश किए है। साथ ही आदेश में यह भी कहा है कि प्राधिकरण के पास प्रतिकार की धनराशि देने के लिए फंड न होने पर जिलाधिकारी राज्य सरकार से उक्त धनराशि प्राप्त कर एक माह के अंदर पीड़िता को दे।
एक आरोपी के मामले की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड में हुई
विशेष लोक अभियोजक हरेंद्र त्यागी ने बताया कि विचारण अभियुक्त आमिल पुत्र फरोस बाल अपचारी/किशोर होने के कारण उसकी पत्रावली पृथक कर किशोर न्याय बोर्ड को प्रेषित की गई थी। जिसके चलते अभियुक्त आमिल के मामले की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड में हुई।