संवाद न्यूज एजेंसी
हापुड़। कोरोना वायरस खत्म होने के बाद भी दर्द दे रहा है। पोस्ट कोविड सिंड्रोम के चलते कई मरीजों में कमजोरी, थकान, सिरदर्द, जोड़ दर्द, नसों में सूजन, मांसपेशियों में दर्द की समस्या सामने आई है। लंबे इलाज के बाद मरीजों को इससे राहत मिल पा रही है। ऐसे में संक्रमण को मात देने के बाद सेहत के साथ लापरवाही करना घातक हो सकता है।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. प्रदीप मित्तल ने बताया कि कई मरीजों में कोरोना संक्रमण होने के बाद एक महीने तक शरीर में अत्यंत कमजोरी, जोड़ों में दर्द, थकावट जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। कुछ मरीजों में सुनने की क्षमता कम होने की शिकायत लेकर आ रहे हैं। जबकि, कुछ को फेफड़े तो कइयों को किडनी संबंधित समस्या हो रही है। साथ ही नसों और मांसपेशियों में सूजन का शिकार भी हो रहे हैं। कोरोना के कारण ह्रदय संबंधी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा है।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. दिनेश खत्री ने बताया कि पॉजिटिव मरीजों में डिप्रेशन, तनाव, कमजोरी और शरीर में रक्त संचार में आने वाली रुकावट के कारण ह्रदय संबंधी शिकायत तेजी से बढ़ रही है। कोरोना पॉजिटिव मरीजों को इलाज के दौरान हाई डोज स्टेरॉयड्स और एंटीबायोटिक देने के कारण उनका दुष्प्रभाव किडनी को डैमेज करता है, जिसे ठीक होने में काफी समय लग सकता है। कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों में रिकवरी के बाद भी फेफड़े से संबंधित परेशानियां हो रही हैं। फेफड़े का एक हिस्सा कमजोर होने के साथ धब्बे भी दिखाई पड़ रहे हैं।
कोरोना पॉजिटिव मरीजों में संक्रमण के दौरान शरीर पर दुष्प्रभाव के कारण ठीक होने के बाद भी कमजोरी, थकावट, सिरदर्द, जोड़ों में दर्द की समस्या, नसों के सूजन, मांसपेशियों में दर्द रह जाता है। व्यक्ति की भूख भी कम हो जाती है। वजन कम होना भी बीमारी का सामान्य साइड इफेक्ट है।
उन्होंने बताया कि कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों में जोड़ दर्द, सिर दर्द, थकान, कमजोर समेत तमाम दिक्कतें सामने आ रही हैं। डायबिटीज वाले मरीजों के लिए उपयुक्त आहार, व्यायाम और दवाओं के साथ एचबीए-1सी 6.5 से कम होना चाहिए। संतुलित पौष्टिक आहार, अच्छा हाईड्रेसन और नियमित शारीरिक व्यायाम भी जरूरी है।