गाजियाबाद। शहरी के साथ अब ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों को भी संपत्ति कर देना होगा। करीब 1.40 लाख नए भवन संपत्ति कर के दायरे में आ गए हैं, जिनमें 50 हजार से ज्यादा को नोटिस जारी कर संपत्ति कर वसूलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नगर निगम के अंतर्गत आने वाले 25 गांवों के 42,629 भवनों की अब तक पहचान की जा चुकी हैं, इनमें 13,386 भवनों से नगर निगम ने 60.54 लाख रुपये कर वसूला है।
गाजियाबाद नगर निगम अगस्त 1994 में बना था, तब 20 गांवों में इसमें सम्मिलित किया गया था। तब से लेकर अब तक केवल इक्का-दुक्का गांव ही संपत्ति के दायरे में था लेकिन अब नगर निगम में 25 गांवों को सम्मिलित कर संपत्ति कर वसूलने की शुरुआत हो गई है। जीआईएस और नगर निगम के मैनुअल सर्वे में अब तक 1.40 लाख ऐसे भवनों की पहचान की गई है, जो संपत्ति कर से छूटे हुए थे। हालाकि, सर्वे अभी जारी है, यह आंकड़ा दो लाख तक पहुंच सकता है।
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि अब तक संपत्ति कर से छूटे 50 से 55 हजार भवनों को नोटिस भेजे जा चुके हैं। नागरिक सुविधाओं में बढ़ोत्तरी के लिए निगम की आमदनी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें काफी हद तक सफलता भी मिल रही है। पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले 34 प्रतिशत अधिक संपत्ति कर वसूला जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 206 करोड़ रुपये कर वसूली हुई थी, जबकि इस बार 31 जनवरी तक 204 करोड़ रुपये कर वसूला जा चुका है।
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जीआईएस सर्वे में खामियां, शासन तक पहुंची शिकायत
नगर निगम क्षेत्र में संपत्ति कर से छूटे भवनों की पहचान के लिए शासन स्तर से जीआईएस सर्वे कराया जा रहा है लेकिन सर्वे कर रही एजेंसी के कार्य में कई तरह की खामियां मिल रही हैं। निगम अधिकारियों ने बताया कि मोहननगर स्थित मोहन मिकिंस कंपनी पर एजेंसी ने 24 लाख रुपया कर बकाया दिखाया लेकिन नगर निगम ने अपने स्तर पर जांच की तो 1.24 करोड़ रुपये बकाया निकला। इसी तरह एबीईएस पर एजेंसी ने एक करोड़ रुपया बकाया दिखाया, जो दोबारा जांच करने पर पांच करोड़ रुपया निकला। इसकी शिकायत शासन तक पहुंच गई है।
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पहले पूरी सुविधाएं मिलें, फिर लगे कर
पूर्व पार्षद मनोज चौधरी का कहना है कि नगर निगम एक्ट के अनुसार सीवर-पानी सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद संपत्ति कर वसूला जाना चाहिए। नगर निगम बनने के बाद से अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में पूरी सुविधाएं नहीं मिली हैं। नागरिकों को संपूर्ण सुविधाएं दिए बिना उनसे कर वसूला उचित नहीं है।
इन गांवों में पहुंच रहे नोटिस
दुहाई, अकबरपुर, मीठापुर, रूपनगर, सिहानी, अर्थला, पसोंदा, काजीपुरा, रईसपुर, बयाना, महरौली, बम्हेटा, मवई, मैनापुर, नायफल, मोरटा, सिकरौड़, गढ़ी, गुलधर, मकनपुर, सदरपुर, मिर्जापुर, अर्थला, करहेड़ा, घूकना आदि।
- 4.52 लाख भवनों से वसूला जा रहा संपत्ति कर
- 5.92 लाख पहुंची कुछ संपत्तियों की संख्या
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नोट : वर्तमान में गाजियाबाद नगर निगम में संपत्ति कर की न्यूनतम दर 0.87 पैसे, मध्यम दर 1.10 रुपये और अधिकतम दर 1.32 रुपये प्रति वर्ग फुट है।