हापुड़। बझेड़ा खुर्द भीड़ हिंसा के मामले को पुलिस ने लगभग पचा ही लिया था। तहरीर बदलवाकर रोडरेज की घटना बताते हुए अज्ञात में मुकदमा दर्ज कर लिया था। इसके बाद मामले के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। जिसके बाद यह मामला तूल पकड़ गया।
ग्रामीणों ने बताया कि घटना के दौरान जब पुलिस मौके पर पहुंची तो भीड़ मदापुर गांव निवासी समयद्दीन और शद्दीकपुरा गांव निवासी कासिम को लाठी डंडो से पीट रही थी। तीन पुलिसकर्मियों के सामने भीड़ इतनी बेकाबू हुई कि पुलिसकर्मी कुछ नहीं कर पाए। इसके बाद आरोपियों ने ही दोनों घायलों को पुलिस को सौंपा।
पुलिस ने मामले में घायल समयद्दीन के भाई यासीन से तहरीर ली। अज्ञात में मुकदमा दर्ज करते हुए बताया था कि समयद्दीन और शद्दीकपुरा गांव निवासी कासिम किसी काम से बाइक से गांव बझेड़ा खुर्द होते हुए धौलाना जा रहे थे। बझेड़ा के समीप उनकी बाइक दूसरी बाइक से टकरा गई। हादसे के बाद बाइक सवार ने अपने गांव के लोगों को बुला लिया। लोगों ने कासिम और समयद्दीन की जमकर पिटाई कर दी। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पर चिकित्सक ने कासिम को मृत घोषित कर दिया।
इसके बाद कासिम को घसीटते हुए ले जाने का फोटो वायरल हुआ, फिर एक वीडियो सामने आया, जिसमें कासिम जमीन पर पड़ा हुआ तड़प रहा था। सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस की काफी किरकिरी हुई थी। इसके बाद तत्कालीन पिलखुवा थाना प्रभारी निरीक्षक अश्वनी कुमार, कांस्टेबल कन्हैया लाल व अशोक कुमार को लाइन हाजिर कर दिया गया था।
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परिवार बोला- दोषियों को उनके किए की सजा मिली
पिलखुवा। करीब साढ़े चार साल बाद अदालत के आए फैसले से मृतक कासिम के परिजन संतुष्ट हैं। उन्होंने न्यायालय के निर्णय पर खुशी जाहिर करते हुए कहा है कि देश में कानून का राज स्थापित है। दोषियों को उनके किए की सही सजा मिली है। कासिम के भाई सलीम ने बताया कि कोर्ट से इस फैसले से इस प्रकार के अपराध पर लगाम लगेगी। अपराधी अपराध करने से पहले कई बार सोचेगा। कासिम के परिवार में उनकी पत्नी नसीम के अलावा चार बेटे महताब, समीर, जुनैद और अरस हैं।