संवाद न्यूज एजेंसी
ब्रजघाट। गंगानगरी के वेदांत मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को हवन और भंडारे के साथ समापन हो गया। वहीं भोगल वाली धर्मशाला में श्रीमद्भागवत कथा से पूर्व मंगल कलश यात्रा निकाली गई।
वेदांत मंदिर में कथा के समापन पर आयोजित हवन में आहूति देते हुए सभी लोगों ने क्षेत्र, देश और विश्व की खुशहाली समेत समस्त जीवों के मंगल की कामना की। भोगल वाली धर्मशाला से मंगल कलश यात्रा शुरू होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए गंगा तट पर पहुंची, जहां सभी ने मां गंगा की पूजा भी की। गंगा पूजन के पश्चात कलश यात्रा वापस कथा स्थल पर आकर संपन्न हो गई। जिसका रास्ते में भक्तों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। प्रथम दिन व्यास भागवताचार्य पंडित नीरेश कृष्ण शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को ज्ञान और वैराग्य के मार्ग की ओर प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि धुंधकारी ने अपने जीवन में पाप कर्म किए, जिसके चलते उसे प्रेत योनि में जना पड़ा। उसके भाई गोकर्णी ने श्रीमद्भागवत सुनाकर उसे प्रेत योनि से मुक्ति दिलाई।
इसके अलावा बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव पुष्पावती पूठ में भागवत कथा के दूसरे दिन वृंदावन धाम से पधारे व्यास रामकृष्ण दास महाराज ने राजा परीक्षित संवाद, शुकदेव जन्म समेत अन्य प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि वन में आखेट के दौरान राजा परीक्षित प्यास लगने पर ऋषि समीक के आश्रम में पहुंच गए, जहां ऋषि समाधि में थे। राजा ने पानी मांगा, लेकिन समाधि में होने के चलते ऋषि उन्हें पानी नहीं पिला सके। जिससे गुस्साए राजा ने मरा हुआ सांप उनके गले में डाल दिया। जिससे क्रोधित होकर ऋषि पुत्र ने राजा को तक्षक नाग के डसने से मृत्यु होने का श्राप दे दिया। जिसका पता चलने पर राजा ने राजपाट त्याग दिया और गंगा नदी पर तप करने पहुंच गए। जहां शुकदेव ने उन्हें श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराकर मोक्ष दिलाया। इस दौरान पार्वती गुप्ता, पवन गुप्ता, अंशु गुप्ता, पूनम शर्मा, सविता, बीना, रेणु, संजीव शर्मा, गुड़िया शर्मा, चुनमुन शर्मा, आदेश शर्मा, रमेश केवट, हरिश्चंद राणा, सोनू सैनी, मिथिलेश, अलका समेत अन्य भक्त मौजूद रहे।