हापुड़। समूह की महिलाएं अब आधुनिक कृषि नर्सरी चलाएंगी। इसमें होने वाले मुनाफे का 80 फीसदी पैसा नर्सरी से जुड़ी महिलाओं में बांटा जाएगा। उद्यान विभाग ने बाबूगढ़ स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में 1.70 करोड़ की लागत से एक एकड़ जमीन पर नर्सरी तैयार की है, जिसे चलाने के लिए अब सिर्फ बिजली कनेक्शन का इंतजार है। समूह की महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। फरवरी के अंत तक यह चालू हो जाएंगी, जिसमें एक बार में सात लाख पौधे तैयार किए जा सकेंगे। कृषि वैज्ञानिकों की निगरानी में पौध तैयार होगी।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल अभियानों के तौर पर शुरू हुई है। सरकारी भवनों में समूह की महिलाओं को कैंटीन चलाने की अनुमति दी गई है, 100 से भी अधिक महिलाएं अपना रोजगार इनसे चला रही हैं। अब शासन ने कृषि से जुड़ी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने का निर्णय लिया है।
इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र में एक आधुनिक नर्सरी तैयार की गई है। उद्यान विभाग की देखरेख में यह कवायद साकार हुई है। एक एकड़ जमीन का सर्वे कर, मिट्टी की सैंपलिंग के बाद नर्सरी का निर्माण किया जा चुका है। इस नर्सरी में सब्जियों से जुड़े पौधे तैयार होंगे, जिन्हें किसान सामान्य दरों पर आसानी से खरीद सकेंगे।
इसके अलावा जो किसान अपना बीज देकर पौध उगवाना चाहेेंगे, समूह की महिलाएं ऐसे किसानों की नर्सरी तैयार करेंगी। इसके बदले किसानों को कुछ पैसा विभाग को देना होगा। दिलचस्प बात यह है कि नर्सरी से होने वाले लाभ का 80 फीसदी पैसा समूह की महिलाओं में बांटा जाएगा। 20 फीसदी पैसा नर्सरी के रखरखाव पर खर्च होगा। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इन्हें नर्सरी तैयार करने का प्रशिक्षण उद्यान विभाग द्वारा दिया जा रहा है।
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इस तरह की नर्सरी होगी विकसित-
नर्सरी में मिर्च, पपीता, केला, गोभी, टमाटर, प्याज, खीरा, तरबूज, शिमला मिर्च आदि के पौधे तैयार करेंगी। ये पौधे उच्च गुणवत्ता के बीज से तैयार किए जाएंगे।
-कृषि वैज्ञानिक करेंगे निगरानी-
कृषि विज्ञान केंद्र में नर्सरी बनाने का उद्देश्य किसानों को आधुनिक प्रजाति के पौधे उपलब्ध कराना है। इसके लिए कृषि वैज्ञानिक नर्सरी का दौरा कर, पौधों पर नजर रखेंगे। समूह की महिलाओं को भी पौध से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।
-गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में भी विकसित होंगी नर्सरी
गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर नर्सरी स्थापित कराने का निर्णय लिया गया है। उद्यान विभाग किसानों से संपर्क कर इसके लाभ बता रहे हैं। नर्सरी पर विभाग द्वारा अनुदान भी दिया जाएगा।
कोट -
समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, नर्सरी के लिए बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया चल रही है। एक महीने में नर्सरी शुरू हो जाएगी। किसानों को अच्छी प्रजाति की पौध मिल सकेगी।डॉ.हरित कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।