नाबालिग से दुष्कर्म करने के तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा
हापुड़। अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने दलित नाबालिग से दुष्कर्म करने के मामले में मंगलवार को निर्णय सुनाया। जिसमें कोर्ट ने तीन को दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
विशेष लोक अभियोजक हरेंद्र त्यागी ने बताया कि थाना गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने कोतवाली में 19 दिसंबर 2020 को एक तहरीर दी। जिसमें उसने कहा कि उसकी 13 वर्षीय नाबालिग पुत्री अपनी दादी से कुछ दूरी पर जंगल में घास काट रही थी। तभी गांव अठसैनी निवासी रिहान पुत्र तसर्रफ, दानिश पुत्र तैय्यब, अब्दुल पुत्र जुल्फेकार व तसलीम पुत्र कल्लन उसकी पुत्री का मुंह दबाकर पास के ईंख के खेत में ले गए। जहां पर चारों ने उनकी नाबालिग पुत्री के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
उसका पुत्र मौके पर पहुंचा तो उसने अपनी बहन को दादी के पास नहीं पाया। जिस पर उसने अपनी बहन की तलाश की। उसको ईंख के खेत से अपनी बहन के चीखने की आवाज सुनाई दी। उसने मौके पर जाकर देखा तो आरोपी वहां से भागने लगे। आरोपियों को उनके पुत्र द्वारा पीछा भी किया गया। लेकिन कुछ दूरी के बाद गांव में सभी आरोपी उसको चकमा देकर गायब हो गए। पुलिस ने मामले में पॉक्सो, एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और उसके आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए। जहां पर न्यायाधीश श्वेता दीक्षित ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मंगलवार को मामले में निर्णय सुनाया। जिसमें आरोपी रिहान, अब्दुल व तसलीम को दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड की अस्सी प्रतिशत धनराशि पीड़िता को देने के लिए कहा है। वहीं, मामले के चौथे आरोपी दानिश की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु को गई है।
दो वर्ष में सुनाया फैसला
न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तेजी से सुनवाई की। मामले में सुनवाई के लिए जहां पुलिस को तेजी से सभी गवाह व साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। वहीं, मामले की सुनवाई के लिए जल्दी-जल्दी तारीख लगाई। मामले में चार आरोपियों के होने के बाद भी न्यायालय ने मुकदमा दर्ज होने के करीब दो वर्ष में ही निर्णय सुना दिया। साथ ही न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखे हुए किसी भी आरोपियों को मुकदमे की पूरी सुनवाई के दौरान जमानत भी नहीं दी थी। जिसके चलते मामले के सभी आरोपी मुकदमे की पूरी सुनवाई के दौरान जेल में ही बंद रहे है।
न्यायालय ने चिकित्सक व महिला सिपाही पर कार्रवाई के लिए कहा
न्यायालय ने मामले में एक चिकित्सक व एक महिला सिपाही को अपने पद स्तर से उचित कार्य न करना पाया है। जिसको लेकर न्यायालय ने चिकित्सक पर आवश्यक कार्रवाई करने के लिए जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया है। साथ ही महिला सिपाही पर उचित कार्रवाई के लिए निर्णय की एक प्रति पुलिस अधीक्षक को भेजी है।
पीड़िता को एक लाख रुपये देने के आदेश
न्यायाधीश ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को पुनर्वास के लिए एक लाख रुपये की प्रतिकार धनराशि देने के भी आदेश किए हैं। साथ ही कहा है कि प्राधिकरण के पास प्रतिकार की धनराशि देने के लिए फंड न होने पर जिलाधिकारी राज्य सरकार से उक्त धनराशि प्राप्त कर एक माह के अंदर पीड़िता को दे।