चार साल से बंद था नलकूूप, खुला पड़ा था बोरवेल
हापुड़। मोहल्ला फूलगढ़ी में बंद पड़े नलकूप के बोरवेल में बच्चा गिरने के मामले में नगर पालिका की बड़ी लापरवाही सामने आई है। करीब 30 वर्ष पुराना यह नलकूप पिछले चार साल से बंद पड़ा था। पहले इससे लोगों के घरों में सप्लाई की जाती थी, जिसे फिर बंद कर दिया गया। लेकिन बोरवेल को खुला ही छोड़ दिया गया। डीएम ने नगर पालिका के अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा है। इसके अलावा ऐसे सभी नलकूपों का सर्वे कर बंद कराने के निर्देश दिए हैं।
मोहल्ले के लोगों ने बताया कि इस नलकूप का निर्माण करीब 30 साल पहले कराया गया था। उस समय इससे आसपास के घरों में पानी की सप्लाई की जाती थी। इसके बाद ओवरहेड टैंक से सप्लाई होने के बाद चार साल पहले इसे बंद कर दिया गया था। तभी से यह खंडहर जैसी हालत में पड़ा था। यहां आसपास के बच्चे खेलने जाते थे। ऐसे में इस खुले बोरवेल में हादसा होना निश्चित था। चार साल तक नगर पालिका ने इसकी सुध नहीं ली। हादसा होने के बाद डीएम ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
डीएम मेधा रूपम ने बताया कि नगर पालिका को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया है। मामले की जांच कराई जाएगी, जो भी अधिकारी कर्मचारी दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा नगर पालिका को सर्वे कराकर ऐसे नलकूपों को बंद कराया जाएगा।
नगर पालिका का बयान, बता रही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
खुले पड़े बोरवेल के मामले में नगर पालिका के अधिकारी अजीब बयान दे रहे हैं। पहले तो नगर पालिका के अफसरों को इस बात की भी जानकारी नहीं थी कि शहर में ऐसे बंद बोरवेल की संख्या कितनी है। इसके अलावा नगर पालिका के कार्यवाही अधिशासी अधिकारी शिवराज सिंह ने बताया कि नगर पालिका ने नलकूप को चार साल पहले बंद कर दिया था। शासन के आदेश पर नलकूप को वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के रूम में परिवर्तित किया गया, लेकिन नलकूप के गेट, खिड़की व बोरवेल के ऊपर लगी जाली को कुछ लोग उखाड़कर ले गए।
शहर में 42 पानी के नलकूप, जिनमें से पांच बंद
नगर पालिका की रिकार्ड के अनुसार शहर क्षेत्र में कुल 42 पानी के नलकूप हैं, जिनमें से पांच किन्हीं न किन्हीं कारणों से बंद हो गए हैं। फूलगढ़ी के नलकूप के बोरवेल को बंद करा दिया गया है। अब बाकी का भी सर्वे कराकर उन्हें बंद किया जाएगा।
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बच्चे का छोटा भाई भी मूकबधिर
बोरवेल में गिरे बच्चे मुआविया का छोटा भाई शुबान भी मूकबधिर है। वह भी सुनने और बोलने में अमर्थर है। इसे देखते हुए डीएम मेधा रूपम ने सीएमओ को निर्देश दिए हैं कि दोनों बच्चों की गले की जांच कराई जाए। इस बीमारी के लिए जिला प्रशासन बच्चों के परिजनों की हर संभव मदद करेगा।