जिला अस्पताल और पिलखुवा सीएचसी में ऑक्सीजन प्लांट नहीं हुआ चालू
हापुड़। कोरोना के नए स्वरूप की आहट को देखते हुए मंगलवार को मॉकड्रिल के दौरान जिला अस्पताल का एक ऑक्सीजन प्लांट शुरू नहीं हो सका। एक ही ऑक्सीजन प्लांट को चालू कर मॉकड्रिल की गई। वहीं पिलखुवा सीएचसी में भी ऑक्सीजन प्लांट चालू नहीं हो पाया। हालांकि, इसके अलावा सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त मिलीं। वहीं, गढ़ रोड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में कोरोना संक्रमित मरीज को पांच मिनट में उपचार मिलना शुरू हो गया।
जिला अस्पताल में कोरोना के मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर मॉकड्रिल हुई लेकिन, इसमें खानापूर्ति देखने को मिली। यहां पर मरीज को उपचार देने का अभ्यास तक नहीं किया गया। मेरठ से आए अपर निदेशक डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह ने यहां पर केवल मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का ही जायजा लिया। हालांकि, एक आक्सीजन प्लांट खराब होने के अलावा यहां पर सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त मिलीं। लेकिन, मरीज को उपचार देने का अभ्यास न करने के कारण उपचार देने के रेस्पोंस टाइम की भी कोई जानकारी नहीं दी गई।
वहीं, सीएचसी में काल्पनिक मरीज को दोपहर करीब 1.10 बजे कोरोना संक्रमित मरीज को लाया गया। जिसकी हालत खराब थी। पीपीई किट पहने कर्मचारियों ने मरीज को स्ट्रेचर से ले जाकर ऊपर वार्ड में भर्ती कराया। वहां पहले से मौजूद स्टाफ ने मरीज का ऑक्सीजन स्तर व अन्य जांच की। मरीज को ऑक्सीजन की खास जरूरत थी। जिसके बाद उसे मशीन चालू कर ऑक्सीजन दिलाई गई। इसके अलावा एसीएमओ डॉ. प्रवीण शर्मा और डॉ. वेदप्रकाश ने वहां पर अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
वार्ड में भर्ती होते ही बढ़ी मरीज की धड़कन
कंट्रोल के जरिए सूचना मिलते ही टीमें मुस्तैद हो गई, मरीज को जैसे ही वार्ड में भर्ती कराया तो उसकी पल्स बढ़ने लगी। चिकित्सकों ने हौसला बढ़ाया तब मरीज सामान्य हो सका। ऐसे में चिकित्सकों ने स्वास्थ्य कर्मियों के साथ तेजी से कार्य किया।
दूसरी लहर से नहीं लिया सबक
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने दूसरी लहर से कोई सबक नहीं लिया है। दूसरी लहर में कोरोना ने मरीजों के फेफड़ों पर वार किया था। जिसके चलते बड़ी संख्या में मौतें हुई थीं। वहीं, मरीजों को चेस्ट फिजीशियन चिकित्सक की भी आवश्यकता पड़ी थी। इसके बाद भी अभी तक जिले में एक भी चेस्ट फिजीशियन की तैनाती नहीं हो सकी है। संक्रमित मरीजों को जनरल चिकित्सकों के सहारे ही उपचार मिलेगा। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि सभी चिकित्सकों को कोविड के निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिलाया गया है।
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सीएचसी में तैयार किया नया आइसोलेशन वार्ड
कोरोना संक्रमण को देखते हुए 30 बेड का नया कोविड आइसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है। सभी बेड पर पाइप लाइन से ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई है। इसके लिए अलग से ही एक बिल्डिंग तैयार की गई है। वार्ड का कार्य करीब पूरा हो चुका है। जल्द ही इसे सीएचसी को हेंडओवर कर दिया जाएगा। जिसके बाद अस्पताल में भी 50 बेड पर संक्रमित मरीजों को भर्ती किया जा सकेगा।
जिला अस्पताल की स्थिति -
ऑक्सीजन बेड की संख्या - 74
ऑक्सीजन प्लांट की क्षमता - 100 लीटर प्रतिमिनट
ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की संख्या - 100
डी टाइप आक्सीजन सिलिंडर की संख्या - 75
सीएचसी की स्थिति
ऑक्सीजन बेड की संख्या - 20
ऑक्सीजन प्लांट की क्षमता - 50 लीटर प्रतिमिनट
ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की संख्या - 35
डी टाइप आक्सीजन सिलिंडर की संख्या - 50
एनसीआर कॉलेज में भी हुआ मॉकड्रिल
मेरठ रोड स्थित नेशनल कैपिटल रीजन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस के जनरल मेडिसिन विभाग द्वारा मॉकड्रिल की गई। इस दौरान अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की जांच की गई। काल्पनिक संक्रमित मरीज को उपचार देकर चिकित्सक व स्वास्थ्य टीम द्वारा जान बचा गई। ह्यूमन मेटाबोलेज्म विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. पंकज अग्रवाल द्वारा निरीक्षण किया गया। इस दौरान सीएमई/सीडीई कोर्डीनेटर डॉ. शिवानी अग्रवाल, डॉ. अश्वनी शर्मा, प्राचार्या डॉ. लिली वालिया, डॉ. अनुराग व्यास उपस्थित रहे।
प्रतिदिन तीन घंटे चलाएं आक्सीजन प्लांट
जिला अस्पताल समेत छह अस्पतालों को कोरोना के मरीजों के लिए आरक्षित कर दिया गया है। इनमें 450 बेड की व्यवस्था है। जिले के सातों ऑक्सीजन प्लांटों को रोजाना तीन घंटे तक चलाया जाएगा। हर बेड पर प्रति मिनट 10 लीटर ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। ऑक्सीजन की शुद्धता की रोजाना रिपोर्ट तकनीकी विभाग को प्रेषित होगी।
- सुनील त्यागी, सीएमओ
जिला अस्पताल में खराब पडा ऑक्सीजन प्लांट। संवाद- फोटो : HAPUR