रैन बसेरे फुल, खुले आसमान के नीचे कट रही सर्द रात
हापुड़। प्रशासन ने ठंड से बचाव के लिए जिले में नौ रैन बसेरे अवश्य शुरू किए हैं, लेकिन फिर भी निराश्रित खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं। हाल यह है कि निराश्रितों के सामने रैन बसेरों की संख्या कम पड़ गई है। ऐसे में सर्द रात में जिंदगी सड़क पर ठिठुर रही है।
अमर उजाला ने सोमवार रात शहर और रैन बसेरों की स्थिति का जायजा लिया। हापुड़ शहर में तीन रैन बसेरे संचालित हैं। लेकिन निराश्रितों की संख्या के आगे ये छोटे पड़ गए हैं। इनमें नगर पालिका की ओर से हीटर और पानी की व्यवस्था नहीं की गई है। रजाइयां और गद्दों की व्यवस्था भी दुुरुस्त नहीं है। हालांकि प्रशासन लगातार बेहतर व्यवस्था के दावे कर रहा है। रैन बसेरे की जानकारी नहीं होने के कारण भी कई लोग खुले में सोते मिले।
रेलवे रोड पर रहती है सबसे अधिक भीड़
अमर उजाला की टीम रेलवे रोड पर देर रात 10 बजे पहुंची। यहां पर स्टेशन के पास रैन बसेरा बनाया गया है। इसमें पुरुष और महिलाओं के लिए अलग-अलग व्यवस्था है। यहां करीब 40 लोगों के रहने की व्यवस्था है। पुरुषों वाला रैन बसेरा फुल था, जबकि महिलाओं वाले में कुछ ही महिलाएं मौजूद थीं। यही हाल नगर पालिका और दिल्ली रोड स्थित रैनबसेरे का भी था।
बाहर सोने को मजबूर हैं लोग
सोमवार की रात रेलवे रोड, अतरपुरा चौपला, तहसील चौपला पर लोग डिवाइडर और दुकानों के आगे शेड में, पेड़ के नीचे सोते मिले। लोगों से बाहर सोने की वजह पूछने पर जानकारी मिली कि रैन बसेरों में उन्हें जगह नहीं मिली है। जबकि कुछ ने रैन बसेरों की जानकारी होने से ही इनकार कर दिया। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि इस संबंध में लोगों को जागरूक करे।
रैन बसेरों में भेजे जाएंगे निराश्रित लोग-
सर्दी में लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। रैन बसेरों की व्यवस्था सही है और इसके लिए लगातार निरीक्षण किए जा रहे हैं। कंबलों का भी वितरण किया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा कि बाहर सो रहे लोगों को रैन बसेरों तक पहुंचाया जाए।
- श्रद्धा शांडिल्यायन, एडीएम
ठंड में स्टेशन पर रजाई ओढकर कर सोते लोग। संवाद- फोटो : HAPUR