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Hapur News: दो महीने में नौ दिन रही सांस लेने लायक रही हवा

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ढ रोड पर छायी धुंध में जाते वाहन । संवाद - फोटो : HAPUR
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दो महीने में नौ दिन रही सांस लेने लायक हवा
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हापुड़। सर्दियों की दस्तक के बाद जिले में प्रदूषण बढ़ा है। अभी कोहरा पड़ना शुरू नहीं हुआ है, इसके बावजूद जिले की हवा खराब है। प्रदूषण की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दो महीने में नौ दिन ही जिले की हवा सांस लेने लायक रही है। जिसके कारण अस्पतालों में प्रदूषण से बीमार लोगों की भीड़ बढ़ी है। ओपीडी में 20 फीसदी मरीज प्रदूषण से बीमार होने के कारण ही पहुंच रहे हैं।
दिल्ली-गाजियाबाद नजदीक होने के कारण हापुड़ भी प्रदूषण की चपेट में है। वैसे पूरे साल ही यहां प्रदूषण का प्रभाव रहता है। लेकिन सर्दियों में हालात और बिगड़ जाते हैं। अक्तूबर और नवंबर के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति काफी खराब है। इन दो महीनों में चार दिन प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक रहा है। 26, 28, 31 अक्तूबर व तीन नवंबर को एक्यूआई 300 से ऊपर रहा। इसके अलावा केवल नौ दिन ही हवा सांस लेने लायक रही है। जिनमें अक्तूबर के आठ दिन और नवंबर का केवल एक दिन शामिल है। प्रदूषण का स्तर 19 दिन कमजोर श्रेणी में रहा है।
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अस्पताल पहुंचे खांसी और गले में दर्द के मरीज
डॉ. असरफ ने बताया कि वायु प्रदूषण के कारण सांस संबंधित समस्या बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों में बढ़ रही है। मरीजों को दवा देकर घर भेजा जा रहा है। कुछ बुजुर्ग गंभीर बीमार होते हैं तो उन्हें भर्ती किया जा रहा है। प्रतिदिन मरीजों में 20 फीसदी प्रदूषण से ही बीमार हैं। गढ़ रोड सीएचसी की ओपीडी लगभग छह सौ की है, जिनमें से 120 से 150 मरीज इसी प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हैं। गले में खांसी, दर्द, आंखों में जलन के अलावा कानों में भी प्रदूषण का प्रभाव देखा जा रहा है। वायु प्रदूषण के कारण आंखों में जलन बढ़ रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल आनंद का कहना है कि जिन्हें परेशानी है व आंखों का पानी से साफ करने के साथ चिकित्सक से सलाह जरूर लें। ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
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नवजात शिशुओं पर भी असर -
शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पालकी नारंग का कहना है कि प्रतिदिन ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है जिन्हें वायु प्रदूषण के कारण गले तथा सांस संबंधित परेशानी है। वायु प्रदूषण से सबसे अधिक परेशानी नवजात शिशुओं को होती है। नवजात शिशुओं को दो पहिया वाहन पर लेकर जाए, तो कपड़े से ढक कर रखें।
पिछले दो महीने में सबसे अधिक प्रदूषित दिन--
दिन एक्यूआई
26 अक्तूबर 328
28 अक्तूबर 308
31 अक्तूबर 336
03 नवंबर 301
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