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निमोनिया, डायरिया, हाइपोथर्मिया से बढ़ रही शिशु मृत्यु दर

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निमोनिया, डायरिया, हाइपोथर्मिया से बढ़ रही शिशु मृत्यु दर
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हापुड़। स्वास्थ्य विभाग के अधूरे इंतजाम और नवजात को जकड़ती बीमारियां उन्हें सुबह का सूरज नहीं देखने दे रही हैं। हापुड़ जिले में हर 1000 नवजात बच्चों में से 46 की मौत हो रही है, एक साल के आंकड़ों पर गौर करें तो इसमें 32 हजार नवजात में से 1472 की जान गई है। दस वर्षों से यही सिलसिला चलता आ रहा है। इसमें सुधार के लिए अब एसएनसीयू और एनबीएसयू अस्पतालों में स्थापित कराई गई हैं। जिनसे मृत्युदर में सुधार की उम्मीद है।
जन्म से कुपोषण का शिकार बच्चों पर निमोनिया, डायरिया, हाइपोथर्निया का अटैक हो रहा है। इन बीमारियों से ग्रस्त नवजात की जीवन डोर कमजोर पड़ रही है। सरकारी अस्पतालों में संसाधन नहीं मिलने के कारण ऐसे बच्चे दम तोड़ रहे हैं। शिशु मृत्यु दर को रोकने की मुहिम भी इस असुविधा से पिछड़ रही है।
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जिले में वर्ष 2012 की गणना पर गौर करें तो उस समय भी 46 से 48 बच्चों की मौत होती थी। करोड़ों के प्रोजेक्ट चलाकर इन आंकड़ों को दुरुस्त करने का प्रयास किया गया। लेकिन अभी भी एक हजार नवजात में 46 की मौत को विभाग रोक नहीं पा रहा है। शासन के आदेश पर सीएचसी में एसएनसीयू, एनबीएसयू यूनिट स्थापित कराई गई हैं, जिनसे अब शिशु मृत्यु दर में कमी आने की उम्मीद है।
एसएनसीयू व एनबीएसयू को समझें
गंभीर नवजात केयर यूनिट (एसएनसीयू) में ऐसे बच्चों को रखा जाता हैं, जिनकी सांसे तेज चल रही हैं, धड़कने सामान्य नहीं हैं। हालत गंभीर बनी है, ऐसे बच्चों को यहां मशीनों के जरिए स्वस्थ रखने का प्रयास किया जाता है। वहीं, नवजात स्थरीकरण इकाई (एनबीएसयू) में जन्म के तुरंत बाद बच्चे को भर्ती किया जाता है, इसमें बच्चे की आवश्यक जांच की जाती हैं।
लिंगानुपात बना है चिंता का विषय
जिले में हर साल करीब 32 हजार बच्चे जन्म लेते हैं। एक हजार के अनुसार गणना करें तो इनमें एक हजार लड़कों के सापेक्ष सिर्फ 868 लड़कियां ही जन्म ले पा रही हैं। सालों से इस आंकड़े में सुधार का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन कुछ खास बदलाव नहीं हुआ है।
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बच्चों के लिए आवश्यक टीकाकरण को समझें
* बीसीजी-यह टीका बच्चे को टीबी की बीमारी से बचाने के लिए लगाया जाता है।
* पीसीबी-निमोनिया से बचाव के लिए नीमो कोकल टीका लगाया जाता है।
* डीपीटी- बच्चों में डिप्थिरिया, गलघोंटू, काली खांसी, टिटनेस से बचाव को टीका लगाया जाता है।
* एमआर- मिजिल्स रूबैला का टीका बच्चों के लिए बेहद आवश्यक है।
* हेपेटाइटिस बी-जानलेवा हेपेटाइटिस से बचाव के लिए यह टीका प्रभावी है।
* पेंटा-पांच जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए यह टीका लगाया जाता है।
* रोटा-डायरिया संबंधी बीमारी से रोकथाम के लिए।
कोट-
जिले में एक हजार बच्चों में 46 नवजातों की मौत हो रही है। अस्पतालों में जन्म लेने वाले हर नवजात बच्चे को एनबीएसयू में रखा जाएगा। गंभीर हालत वाले बच्चों को एसएनसीयू में भर्ती कराया जाएगा। इस व्यवस्था से शिशु मृत्युदर में कमी आएगी। - डॉ. प्रवीण शर्मा, एसीएमओ।
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