न्यायिक अधिकारियों की फर्जी मुहर से भुगते चालान
हापुड़। कचहरी में एक अधिवक्ता के मुंशी ने न्यायिक अधिकारियों की फर्जी मुहर से चालान के निस्तारण कर दिए। मामले की जानकारी होने पर पीड़ित ने कोतवाली में तहरीर दी। पुलिस ने मुंशी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया है। जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। मामले का बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने विरोध किया है।
जिला बुलंदशहर के गांव काजमपुर निवासी मशरूफ ने बताया कि 12 अगस्त 2020 को वह किसी काम से कार से हापुड़ आया था। इस दौरान यातायात पुलिस ने कार का चालान कर दिया था। चालान भरने के लिए वह 20 अक्तूबर को हापुड़ कचहरी में आया था। इस दौरान उसकी मुलाकात कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला आर्यनगर निवासी रितिन गौड़ से हुई थी। रितिन ने खुद को अधिवक्ता बताते हुए दो दिन में चालान का निस्तारण कराने का आश्वासन दिया और 1350 रुपये ले लिए। कुछ दिन पहले रितिन गौड़ ने चालान जमा करने के संबंध में एक रसीद की कापी व्हाट्सएप के जरिए उसे भेजी थी। वह रसीद की कॉपी को लेकर यातायात कार्यालय में पहुंचा तो पुलिसकर्मियों ने रसीद को फर्जी बताकर लौटा दिया। जिसके बाद उसने कोतवाली में तहरीर दी। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक संजय पांडेय ने बताया कि मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। आरोपी को जेल भेज दिया गया है। आरोपी ने धोखाधड़ी करने के लिए न्यायाधीश की फर्जी मुहर बनवाई हुई थी। वहीं मशरूफ को भेजी गई रसीद पर न्यायाधीश की फर्जी मुहर लगी थी और फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए थे।
बार एसोसिएशन ने किया विरोध
मामले का बार एसोसिएशन ने विरोध किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष हाजी ऐनुल-हक का कहना है कि पुलिस ने मामले में रितिन गौड़ को गलत फंसाया है। इस प्रकरण में संबंधित न्यायालय के कर्मचारियों की मिलीभगत है। वह उच्चाधिकारियों से मामले की शिकायत कर निष्पक्ष जांच और संबंधित कर्मचारियों की संपत्तियों की जांच कराएंगे, जो उन्हें इस प्रकार के फर्जीवाड़े से कमाई है। इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की जाएगी।