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दुष्कर्म के दोषी को दस वर्ष के कारावास की सजा

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दुष्कर्म के दोषी को दस वर्ष के कारावास की सजा
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हापुड़। अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने नाबालिग के दुष्कर्म के मामले में एक आरोपी को दोषी करार दिया है। जिसमें न्यायाधीश ने दोषी को दस वर्ष के कारावास की सजा व पंद्रह हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
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विशेष लोक अभियोजक हरेंद्र त्यागी ने बताया कि 25 फरवरी 2017 को एक व्यक्ति ने थाना बाबूगढ़ में तहरीर दी। जिसमें उसने कहा कि उसका भाई अपनी पत्नी के साथ एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए गए थे। इस दौरान उनकी 14 वर्षी भतीजी घर पर अकेली थी। जिसका फायदा उठाकर गांव भमरा थाना गुलावठी जिला बुलंदशहर निवासी सोनू पुत्र बनवारी उनके भाई के घर में घुस गया और घर पर अकेली भतीजी के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। भतीजी के शोर मचाने पर आसपास के कुछ लोग मौके पर पहुंच गए। जिन्होंने आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया, जिसके बाद वह गांव के अन्य लोग के साथ आरोपी को लेकर बाबूगढ़ थाने पहुंचा। पुलिस ने पीड़िता के नाबालिग होने के कारण मामले की दुष्कर्म, पॉक्सो सहित विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया। इसके बाद से मामले की सुनवाई अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट में चल रही थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश श्वेता दीक्षित ने बृहस्पतिवार को मामले में निर्णय सुनाया। जिसमें उन्होंने आरोपी को दोषी करार देते हुए दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड की 80 प्रतिशत धनराशि पीड़िता को देने के आदेश किए। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता के पुनर्वास के लिए एक लाख रुपए की प्रतिकार धनराशि देने के आदेश भी किए। न्यायाधीश ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट रुप से कहा कि यदि प्राधिकरण के पास फंड नहीं हो तो जिलाधिकारी प्रतिकार धनराशि को राज्य सरकार से प्राप्त कर एक माह के अंदर पीड़िता को दे।
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