जिले में ग्रैप का तीसरा चरण लागू, निर्माण कार्यों पर भी रोक
हापुड़। एनसीआर में बिगड़ती हवा ही हालत को देखते हुए जिले में भी ग्रैप का तीसरा चरण लागू कर दिया गया है। ग्रैप तीन के नियमों के तहत अब दूसरी पाबंदियों के साथ यहां निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी, हालांकि सरकारी निर्माण कार्य विशेष एहतियात के साथ जारी रहेंगे।
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी उत्सव शर्मा ने बताया कि वर्तमान में भी प्रदूषण की स्थिति ठीक नहीं है, जबकि आने वाले दिनों में प्रदूषण के हालात और खराब होने की उम्मीद है। ऐसे में ग्रैप के तीसरे चरण की पाबंदियां हापुड़ में भी लागू कर दी गई हैं। निर्माण कार्य पर रोक रहेगी। इंडस्ट्री में प्रतिबंधित ईंधन जलता पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी। बालू, मिट्टी लोडिंग अनलोडिंग पर प्रतिबंध रहेगा। मियाद पूरी कर चुके डीजल वाहनों पर कार्रवाई के लिए परिवहन विभाग को निर्देशित किया गया है। सभी निकायों को नियमित रूप से पानी के छिड़काव के लिए निर्देशित किया गया है। जनरेटर न चलें इसके लिए बिजली सप्लाई सही करने को कहा गया है।
फिर बढ़ने लगा प्रदूषण का स्तर ---
हवा की रफ्तार धीमी पड़ते ही जिले का प्रदूषण स्तर फिर बढ़ गया है। 24 घंटे के अंदर एक्यूआई 100 अंक बढ़ गया है। आगामी 24 घंटे में जिला एक्यूआई का स्तर 300 के पार पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, खुले में घरों के निर्माण करने की सामग्री के साथ-साथ खेतों में पराली जलाई जा रही है। जिसके कारण प्रदूषण का स्तर में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। अब प्रदूषण का स्तर 180 से 340 के बीच चल रहा है। प्रदूषण आंकने वाले मापक (एक्यूआई) का सूचकांक बृहस्पतिवार को बुधवार के मुकाबले 100 अंक बढ़कर 285 पहुंच गया। प्रदूषण विभाग के अनुसार एक्यूआई का यह स्तर प्रदूषण की पी ली श्रेणी में आता है, यह हवा सामान्य और स्वस्थ मनुष्यों के लिए भी खतरनाक है। सांस और हृदय रोगियों के लिए तो इस हवा में सांस लेना भी अच्छा नहीं है।
448 पहुंचा पीएम-2.5 का स्तर
एक्यूआई के साथ-साथ पीएम-2.5 और पीएम-10 का स्तर भी बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को पीएम-2.5 का अधिकतम स्तर 448 और न्यूनतम स्तर 92 दर्ज किया गया। वहीं, पीएम-10 का अधिकतम स्तर 333 और न्यूनतम स्तर 167 दर्ज किया गया। फिजीशियन डॉ. हरिओम सिंह ने बताया कि पीएम-2.5 आकार के सूक्ष्म कण फेफड़ों के रास्ते कई बार दिल की धमनियों तक पहुंचकर अटैक का कारण बनते हैं। प्रदूषण से रक्तचाप भी बढ़ता है।
जलाई जा रही पराली और कूड़ा -
ग्रेप का तीसरा चरण लागू भले ही हो गया हो, लेकिन जिले में इसके लिए सतर्कता नहीं दिख रही है। नियमों की अनदेखी हो रही है और किसी प्रकार का जुर्माना नहीं लगाया जा रहा है। कूड़ा पराली खुलेआम जल रहा है।
पिछले छह दिनों एक्यूआई की स्थिति
दिनांक एक्यूआई
28 अक्तूबर 276
29 अक्तूबर 316
30 अक्तूबर 278
31 अक्तूबर 340
01 नवंबर 321
02 नवंबर 185