दिवाली के बाद रेड जोन में हापुड़, 312 पहुंचा एक्यूआई
हापुड़। दिवाली पर हुई आतिशबाजी से वातावरण में घुला जहर अब तेजी से फैल रहा है। जिससे जिले की आबोहवा जहरीली हो गई है। बुधवार के मुकाबले बृहस्पतिवार को एक्यूआई 58 अंक बढ़कर 312 पर पहुंच गया। जिले का प्रदूषण स्तर लाल श्रेणी में पहुंच गया है। जिसके कारण सांस के मरीजों की भी मुसीबत भी बढ़ गई है। वह चिकित्सकों के परामर्श लेने के लिए अस्पताल पहुंचने लगे हैं।
जिले में दिवाली पर रात को जमकर आतिशबाजी हुई थी। हालांकि, रात को चली तेज हवाओं के कारण दिवाली के अगले दिन एक्यूआई का स्तर सामान्य बना हुआ था। लेकिन, हवा की रफ्तार जैसे ही रुकी तो प्रदूषण का स्तर भी तेजी से बढ़ने लगा है। बुधवार को जिले के एक्यूआई का सूचकांक 254 दर्ज किया गया था, जो बृहस्पतिवार को बढ़कर 312 पर पहुंच गया। प्रदूषण की एक बार फिर गंभीर होती स्थिति से लोगों की सेहत भी खराब होने लगी है।
खतरनाक हुई हवा में सांस लेना भी लोगों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है। ओपीडी में सांस लेने में तकलीफ के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। ज्यादातर बच्चे और बुजुर्ग है। अनेक लोग आंखों में जलन, खांसी, नाक और गले में इंफेक्शन की समस्या से भी पीड़ित हो गए है। बुजुर्गों और बच्चों में सांस लेने की समस्या रही।
पीएम 2.5 की मात्रा पहुंची 339
प्रदूषण में पार्टिकल पीएम 2.5 और पीएम 10 का अहम रोल होता है। इनकी मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। बृहस्पतिवार को पीएम 2.5 की अधिकतम मात्रा 339 दर्ज की गई। जबकि पीएम 10 की अधिकतम मात्रा 197 तक पहुंच गई है। इसका सामान्य स्तर 50 तक होता है।
प्रदूषण से बढ़ने लगे आंखों के मरीज
प्रदूषण ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। आंखों में जलन और सांस रोगियों को एक बार फिर दिक्कत हो गई है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल आनंद ने बताया प्रदूषण के कारण आंखों में जलन की शिकायत वाले रोगियों की संख्या बढ़ी है। इसके अलावा सांस रोगियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। सभी मॉस्क लगाएं और जरूरी काम से ही बाहर निकलें।
टहलने से परहेज करें सांस रोगी
स्मॉग की स्थिति को देखते हुए चिकित्सक बच्चों और बुजुर्गों को घरों में रहने की सलाह दे रहे हैं। चिकित्सक डॉ. जीवोत्तम नारंग कहते हैं कि वर्तमान में हालात काफी खतरनाक हैं। लोगों को घरों से बाहर निकलने पर सांस लेने में दिक्कत हो रही है। खासकर सुबह शाम टहलने निकलने वाले लोग अधिक परेशानी महसूस कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में सांस रोगियों को काफी सचेत रहने की आवश्यकता है। ऐसे लोग जब तक प्रदूषण से स्थिति सही न हो जाए, घरों में ही रहें और खुले वातावरण में न जाएं। बच्चों को भी इस मौसम में घरों में रखें।
कोट -
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन द्वारा सख्त कदम उठाए जाएंगे। संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जा चुका है। वे खुद इसकी निगरानी करेंगी। - श्रद्धा शांडिल्यायन, एडीएम।