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दुष्कर्म के दोषी तांत्रिक को दस वर्ष के कारावास की सजा

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दुष्कर्म के दोषी तांत्रिक को दस वर्ष के कारावास की सजा
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हापुड़। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट कोर्ट ने एक तांत्रिक को दुष्कर्म के आरोपी को दोषी करार दिया है। जिसमें कोर्ट ने दोषी को दस वर्ष के कारावास की सजा के साथ ही तीस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
विशेष लोक अभियोजक विनीता त्यागी ने बताया कि सात नवंबर 2014 को पिलखुवा कोतवाली में एक व्यक्ति ने तहरीर दी। जिसमें उसने कहा कि वह छह नवंबर 2014 को उपचार के लिए अपनी पत्नी को मोहल्ला रमपुरा थाना पिलखुवा निवासी तांत्रिक महेश तोमर के पास लेकर गया। जहां पर तांत्रिक उसे घर पर बैठाकर, उसकी पत्नी को उपचार करने के बहाने जंगल में ले गया। तांत्रिक ने उसकी पत्नी के साथ दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं तांत्रिक ने कहा कि यदि वह इस घटना के बारे में किसी को बताएगी तो वह और उसका पति पागल हो जाऐंगे। लेकिन डरी हुई हालत में उसकी पत्नी ने घटना के बारे में बता दिया।
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पीड़ित अनुसूचित जाति से से होने के कारण पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दुष्कर्म के साथ ही एससीएसटी एक्ट की धारा में दर्ज की। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट कोर्ट में चल रही थी। जिसमें दोनों पक्षों को सुनने के बाद बृहस्पतिवार को न्यायाधीश उमाकांत जिंदल ने निर्णय सुनाया। जिसमें न्यायाधीश ने आरोपी महेश तोमर को दोषी करार देते हुए दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही तीस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड न देने पर दोषी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगताना होगा।
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