आपदा को भू-माफियाओं ने बनाया अवसर
धौलाना/हापुड़। कोरोना और लॉकडाउन की पाबंदियों के बीच धौलाना क्षेत्र में भू माफियाओं ने सरकारी जमीन पर जमकर खरीद फरोख्त का खेल किया। वर्ष 2019 में एसडीएम के आदेश को निरस्त कराने के बाद माफियाओं ने भूमि के क्रय विक्रय का अधिकार ले लिया था।
जिला बनने से पहले धौलाना क्षेत्र हापुड़ तहसील के ही अंतर्गत आता था। साल 1997 में सरकारी भूमि पर 123 लोगों को दिए गए पट्टों को भूमिधर में तब्दील करा दिया गया था। 1998 में मामला खुला तो एसडीएम हापुड़ ने क्रय विक्रय के आदेश को ही निरस्त कर दिया था। वर्ष 2011 में हापुड़ के जिला बनने पर धौलाना तहसील का सृजन हुआ। अहम दस्तावेजों को हापुड़ और गाजियाबाद से स्थानीय तहसील में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू होने पर फर्जी दस्तावेजों से मूल पत्रावलियों की बदलने का खेल हुआ। इसके बाद भू माफियाओं ने एसडीएम के आदेश को चुनौती देने के लिए नया खेल खेला। इसमें वादी और प्रतिवादी एक ही सोच रखने वाले थे। मेरठ में वाद दायर किया किया। एक पक्ष ने कमजोरी दिखाई, जिस पर 2019 में वहां से एसडीएम के क्रय विक्रय के रोक के आदेश को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद फिर से भू माफियाओं को सरकारी भूमि पर क्रय विक्रय का अधिकार मिल गया। वर्ष 2020 में लॉकडाउन और कोरोना की पाबंदियों के बीच भू माफियाओं को कोई टोकने वाला नहीं था। धौलाना क्षेत्र में बढ़ते औद्योगिक विकास को लेकर एनसीआर के लोगों ने जमकर खरीद फरोख्त की।
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आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर
इस मामले में डीएम के आदेश पर 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। पुलिस लगातार दबिश दे रही है, लेकिन भू माफिया हत्थे नहीं चढ़ पा रहे हैं।