ऊर्जा निगम ने 273 किसानों को भेजे 20 लाख तक के वसूली के नोटिस
हापुड़। डॉ. आंबेडकर सामूहिक नलकूप योजना में शामिल अनुसूचित जाति के 273 किसानों की जमीनें बिकने की कगार पर हैं। क्योंकि वर्ष 2011 में बसपा सरकार में 273 किसानों को निशुल्क कनेक्शन दिए गए, जिनसे केवल 1500 रुपये महीने ही बिल वसूला जाना था, लेकिन अब ऊर्जा निगम ने इन किसानों को पांच लाख से 20 लाख तक के नोटिस जारी किए गए हैं, इनमें एक महीने का बिल ही 40 हजार रुपये तक बनाकर भेजा गया है।
वर्ष 2011 में डॉ. आंबेडकर सामूहिक नलकूप योजना में अनुसूचित जाति के किसानों को लाभ दिया गया। पांच किसानों का समूह बनाकर उनके खेत पर 15 हॉर्सपावर का निशुल्क नलकूप लगाया गया। ऐसे किसानों के नाम दो से पांच बीघा ही जमीन थी। पांच सदस्यों में एक के नाम कनेक्शन खोला गया। हालांकि वर्ष 2011 में ही पश्चिमांचल विद्युत निगम के एमडी ने इन कनेक्शनों को सब्सिडी योजना से हटाकर कॉमर्शियल में करने के आदेश दिए थे। वर्ष 2014 तक ऊर्जा निगम के अधिकारियों को नए आदेश की परवाह नहीं हुई। जिसके चलते निगम के कर्मचारी ऐसे किसानों से एलएमवी-5 में हर महीने करीब 1500 रुपये का बिल जमा कराते चले गए। लेकिन वर्ष 2015 के बाद से इन किसानों को नोटिस जारी कर, पांच लाख से 20 लाख रुपये तक की रिकवरी भेज दी गई। मजे की बात यह है कि समूह के अन्य सदस्य प्रमाण पत्र देकर खुद का ऐसे नलकूपों से मतलब नहीं होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। लेकिन जिसके नाम कनेक्शन था वह फंस गए। आलम यह है कि दो-दो बीघा वाले किसान यदि अपनी पूरी जमीन बेच भी दें तब भी वह इतना बिल जमा करने की स्थिति में नहीं आएंगे।
एक महीने का कितना बिल, नहीं बता पा रहे अधिकारी
डॉ. आंबेडकर सामूहिक नलकूप योजना में शामिल जिन किसानों को नोटिस जारी हुए हैं वह निगम अफसरों के कार्यालयों में चक्कर लगा रहे हैं। हर महीने कितना बिल बन रहा, इसकी जानकारी भी अफसर नहीं दे पा रहे। क्लर्क की मानें तो हर महीने 18-20 हजार का बिल बनता है, जबकि रिकॉर्ड पर गौर करें तो एक महीने में 40 हजार से भी ज्यादा का बिल बनाया जा रहा है।
पीवीवीएनएल के एमडी को भेजा पत्र
डॉ. आंबेडकर सामूहिक नलकूप योजना के तहत लगे कनेक्शनों को एलएमवी-8 किए जाने पर लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ने पीवीवीएनएल के एमडी को पत्र भेजकर इन नलकूपों के बिल एलएमवी-5 श्रेणी में ही बनाए जाने के अपील की थी। वहीं इस समस्या को स्थानीय अधिकारी अपने स्तर से नहीं सुलझा पा रहे हैं, शासन तक इस मामले को भेजा गया है।
उच्चाधिकारियों को कराया है अवगत
डॉ. आंबेडकर सामूहिक नलकूपों के बिल एलएमवी-8 कॉमर्शियल श्रेणी में ही बनाए जाने के आदेश मिले थे। उसी के अनुसार बिल बनाकर, रिकवरी का नोटिस जारी किया गया है। किसानों की शिकायतें आ रही हैं, जिनसे उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। - मनोज कुमार, अधिशासी अभियंता।