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झमाझम बारिश से तीन हजार हेक्टेयर में बंदगोभी की फसल बर्बाद

सार

झमाझम बारिश से तीन हजार हेक्टेयर बंदगोभी की फसल बर्बाद हापुड़।झमाझम बारिश से तीन हजार हेक्टेयर में लगी बंदगोभी की फसल बर्बाद हो गई है, खेतों में जलभराव से फसल में गलन और ब्लाइट लगने का खतरा है।एक महीने के पौधे में जलभराव से गलन फैलने का खतरा है, दो दिन और बारिश के आसार हैं।
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विस्तार
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झमाझम बारिश से तीन हजार हेक्टेयर बंदगोभी की फसल बर्बाद
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हापुड़। झमाझम बारिश से तीन हजार हेक्टेयर में लगी बंदगोभी की फसल बर्बाद हो गई है, खेतों में जलभराव से फसल में गलन और ब्लाइट लगने का खतरा है। किसानों ने पिछले महीने ही 33 हजार रुपये प्रति किलो की दर से बीज लेकर इसकी रोपाई की थी। 50 से अधिक गांवों के किसान इस फसल से जुड़े हैं, जिन्हें करीब आठ करोड़ के नुकसान का अनुमान है। उद्यान विभाग के अधिकारी सर्वे कर फसल क्षति का आंकलन करने का दावा कर रहे हैं।
जिले में हर साल करीब तीन हजार हेक्टेयर रकबे में बंदगोभी की खेती की जाती है। यहां से विभिन्न प्रदेश व जिलों में गोभी की सप्लाई होती है। जुलाई महीने में किसानों ने इसकी बुवाई शुरू की थी। लेकिन इसके बाद से लगातार बारिश ने फसल को बर्बाद कर दिया। किसानों ने खेतों की जुताई कर, अगस्त में फिर से नई पौध लगाई, जिसे अब खेतों में रोपा गया था।
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लेकिन बुधवार को झमाझम बारिश ने किसानों के अरमानों पर फिर से पानी फेर दिया। आलम यह रहा कि बंदगोभी की अधिकांश फसल पानी में डूब गई। किसान खेतों से पानी निकालने में जुटे रहे। एक महीने के पौधे में जलभराव से गलन फैलने का खतरा है, दो दिन और बारिश के आसार हैं। ऐसे में फसल को बचाना मुश्किल है। इसके अलावा बादल छंटने पर चटक धूप में पौधे के झुलसने और ब्लाइट का प्रकोप भी किसानों की नींद उड़ा रहा है।
इन गांवों में होती है बंदगोभी की फसल
गांव महमूदपुर, सांवई, हुमांयुपुर, नवादा, मीरपुर, उबारपुर, सलाई, काठीखेड़ा, श्यामपुर, ददायरा, लालपुर, सीतादेई, रसूलपुर, दयानतपुर, मंसूरपुर, जरौठी, असौड़ा, धनौरा, कांवी, महमूदपुर, नवादा, चितौली, उबारपुर, श्यामनगर आदि गांवों में बड़े पैमाने पर बंदगोभी की खेती होती है।
पड़ाव पर लगती है मंडी, कई राज्यों में सप्लाई होता है माल
बंदगोभी की बिक्री के लिए बुलंदशहर रोड स्थित पड़ाव पर अस्थाई मंडी बनी हुई है। जिसमें सितंबर महीने से बंद गोभी पहुंचनी शुरू हो जाती है। यहां से हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड समेत उत्तर प्रदेश के कई राज्यों में इसका निर्यात होता है।
धान की फसल को भी नुकसान
बारिश से धान की फसल को भी काफी नुकसान हुआ है। जिन खेतों में धान की कटाई हो चुकी है, उनमें पानी भरने से दाना काला पडने की आशंका बन गई है। इस तरह के धान का मंडी में किसानों को अच्छा दाम नहीं मिल सकेगा। आसमान में अभी भी बादल छाएं हैं, जिससे किसान परेशान हैं।
गन्ना और बागवानी को लाभ
गन्ना और बागवानी में काफी रोग है, कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक सिंह के अनुसार इस बरसात से इन दोनों ही फसलों को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा। बारिश से रोगों का खतरा कम होगा।
दो बार बर्बाद हो चुकी है फसल
जुलाई महीने में बंद गोभी की फसल लगाई थी, जो बारिश से बर्बाद हो गई थी। इसके बाद अगस्त में फिर से फसल लगाई, जो फिर से बारिश में धुल गई। उन्हें अब तक दो लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। - टेनपाल सिंह, किसान महमूदपुर।--फोटो संख्या--03
33 हजार रुपये किलो लिया था बीज
बाजार से 33 हजार रुपये किलो की दर से बीज लेकर फसल की बुवाई की थी। लेकिन बारिश में फसल बर्बाद हो गई। बंदगोभी की फसल से उम्मीद थी, जो टूट गई है। फसल क्षति का जल्द आंकलन होना चाहिए। - भगतराम सिंह, किसान ददायरा।--फोटो संख्या--04
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कोट -
बारिश से बंदगोभी की फसल को हुए नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। जिले में समय से पहले बंदगोभी की बुवाई कर दी जाती है, नर्सरी भी तैयार नहीं की जाती, सीधे बीज रोप दिए जाते हैं। आंकलन के बाद ही फसल क्षति के बारे में बताया जा सकता है। - डॉ. हरित कुमार, डीएचओ।

बंदगोभी की फसल में बरसात के बाद भरा पानी- फोटो : HAPUR

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