महिला अस्पताल में शौचालयों पर लगे ताले, प्रसूताएं खुले में जाने को मजबूर
हापुड़। कोठीगेट स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय में रातभर प्रसूताओं को शौचालय के लिए भटकना पड़ा। अस्पताल में चार-चार शौचालय हैं, लेकिन सफाई न होने के कारण ताले लगे हुए हैं। यह हाल तब है जब नगर पालिकाध्यक्ष द्वारा अस्पताल को गोद लिया हुआ है। अस्पताल के इंचार्ज कई बार पत्र लिख चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
महिला अस्पताल शहर के बीच होने के कारण प्रतिदिन यहां 300 से अधिक ओपीडी होती हैं। एक महीने में यहां 140-150 प्रसव भी होते हैं। लेकिन अव्यवस्थाएं मरीजों की जान पर आफत बन रही है। अस्पताल परिसर में पीछे चार शौचालय हैं, लेकिन सभी बंद पड़े हैं। चौक होने के कारण इनमें शौच करना तो दूर पास जाना भी मुश्किल होता है।
नगर पालिकाध्यक्ष ने इस अस्पताल को गोद लिया था। लेकिन एक दो कामों को छोड़कर यहां कोई जनहित का कार्य नहीं हुआ है। सोमवार को अस्पताल में तीन प्रसूताओं के प्रसव हुए, लेकिन रात में शौच के लिए वह भटकने लगी। तीमारदार अस्पताल परिसर के चक्कर लगाने लगे, लेकिन यहां न तो स्टाफ मिला और न ही शौचालय। मजबूरी में उन्हें खुले में जाना पड़ा। इसके चलते अस्पताल परिसर में बदबू के कारण रुकना मुश्किल होता है।
अस्पताल में सिर्फ दो स्टाफ नर्स
अस्पताल में सिर्फ दो ही स्टाफ नर्स हैं, जो शाम आठ बजे तक ही रुकती हैं। इसके बाद प्रसूताओं की देखरेख करने वाला कोई चिकित्सक नहीं होता। तीमारदारों ने बताया कि शौच आदि के लिए सुलभ शौचालयों में जाना पड़ता है जहां पैसे भी लगते हैं।
कोट --
शौचालयों के लिए कई बार पत्र लिखा है, नगर पालिकाध्यक्ष को फोन भी किया है। लेकिन शौचालयों की व्यवस्था नहीं हो सकी है। उच्चाधिकारियों को इस मामले से अवगत कराया जा चुका है।--डॉ.योगेश गुप्ता, प्रभारी, राजकीय महिला चिकित्सालय।
कोठी गेट स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय में खराब पड़े शौचालय । संवाद- फोटो : HAPUR