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गन्ने की सीओ-0238 प्रजाति को बदलने की तैयारी

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गन्ने की सीओ-0238 प्रजाति को बदलने की तैयारी
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हापुड़। पांच साल तक बंपर पैदावार के साथ किसानों का सिरमोर रही गन्ने की सीओ-0238 प्रजाति को बदलने की तैयारी है। इस साल 41 हजार हेक्टेयर रकबे में इस प्रजाति का गन्ना उगाया गया है, जिसमें रोग लगने के कारण 30 से 35 फीसदी उत्पादन घटने के आसार हैं। कृषि विज्ञान केंद्र ने दो नई प्रजातियों का प्रस्ताव रखा है, गन्ना विभाग ने भी लखनऊ और शाहजहांपुर की दो प्रजातियों के गन्ने की बुवाई किसानों से कराई है।
जिले में बड़े पैमाने पर गन्ना उत्पादन होता है, पांच साल पहले करनाल से सीओ-0238 प्रजाति को हापुड़ लाया गया था। इस प्रजाति का उत्पादन 900 से 1000 क्विंटल/हेक्टेयर रहा। अगैती प्रजातियों में 0238 किसानों को खूब रास आई। रिकवरी अच्छी होने के चलते चीनी मिलों के लिए भी गन्ने की यह प्रजाति मुनाफे का सौदा रही।
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लेकिन इस साल सीओ-0238 बीमारियों की चपेट में है, तमाम दवाओं के प्रयोग के बावजूद बीमारी कम होने का नाम नहीं ले रही है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के सर्वे में 30 से 35 फीसदी फसल प्रभावित होने की रिपोर्ट तैयार की गई है। वैज्ञानिकों ने गन्ना विभाग से इस प्रजाति को रिजेक्ट कर, दूसरी नई प्रजातियों की बुवाई का प्रस्ताव दिया है।
फसल में लगा यह रोग
सीओ-0238 प्रजाति के गन्ने में इस वर्ष पोक्का बोइंग, लाल सड़न रोग, टॉप बोरर रोग लगा है। तीनों ही रोग गन्ने के लिए बेहद खतरनाक है, दवाओं के इस्तेमाल से भी बीमारी दूर नहीं हो रही है। इसी के चलते इस प्रजाति को बदलने की तैयारी की जा रही है।
2.10 फीसदी घटा है रकबा
इस साल जिले के 41946.448 हेक्टेयर रकबे में गन्ने की बुवाई की गई है, जो बीते साल के मुकाबले करीब 2.10 फीसदी कम है। पिछले साल 42846.780 हेक्टेयर रकबे में फसल उगाई गई थी।
जिले में गन्ना की स्थिति
कुल रकबा---41946.448 हेक्टेयर
पौधा-----19238.930 हेक्टेयर
पेड़ी-----22707.518 हेक्टेयर
लखनऊ और शाहजहांपुर में विकसित नई प्रजातियां होंगी लाभप्रद
सीओ-0238 प्रजाति के स्थान पर लखनऊ की सीओएलके-14201 और शाहजहांपुर की सीओएस-13235 प्रजाति के गन्ने की हापुड़ में बुवाई की तैयारी है। भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान ने इन प्रजातियों को तैयार किया है। इनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन भी 900 से 1000 क्विंटल/हेक्टेयर बताया जा रहा है।
करनाल की सीओ-15023 प्रजाति किसानों को नहीं आई रास
करनाल की सीओ-15023 प्रजाति की बुवाई हापुड़ के कुछ किसानों ने की थी। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने उनसे फीडबैक लिया, जिसमें बताया गया कि इस प्रजाति की पैडी अच्छी नहीं होती, जबकि पैडी से ही किसानों का औसत आता है।
गन्ने की बुवाई के समय रखें ध्यान
* बीज उपचार करने के बाद ही बुवाई करें।
* आठ से दस महीने के गन्ने का ही बीज बनाएं, इससे पुराना गन्ना न हो।
* जिस खेत में रोग है, वहां से गन्ने का बीज कतई न खरीदें।
* गन्ने के जिस खेत में बीमारी है, उसमें फसल बदलकर बुवाई करें।
(नोट : कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अशोक कुमार ने ये टिप्स दिए हैं।)
सीओ-0238 प्रजाति में कई बीमारी
गन्ने की सीओ-0238 प्रजाति में तीन से अधिक गंभीर बीमारियां देखी गई है। इस प्रजाति को रिजेक्ट करने का समय आ गया है, गन्ना विभाग से भी इस संबंध में वार्ता की है। दो नई प्रजातियों की बुवाई का सुझाव दिया गया है। - अशोक कुमार, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र बाबूगढ़।
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किसानों को उपलब्ध कराया है नया बीज
किसानों को नई प्रजाति का गन्ने का बीज मुहैया कराया गया है। फसलों का निरीक्षण कर, किसानों को जागरूक किया जा रहा है। नई प्रजातियों के चयन में किसानों का पूरा सहयोग किया जा रहा है। इस साल गन्ने का रकबा बीते साल के मुकाबले 2.10 फीसदी कम है। - निधि गुप्ता, जिला गन्ना अधिकारी।
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