बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कारावास की सजा
हापुड़। अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने करीब पौने पांच वर्ष की सुनवाई के बाद पांच वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में शनिवार को निर्णय सुनाया। न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है वहीं बीस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
विशेष लोक अभियोजक हरेंद्र कुमार त्यागी ने बताया कि थाना हापुड़ देहात में 28 दिसंबर 2017 को एक व्यक्ति ने तहरीर दी। जिसमें उसने कहा कि उसकी पांच वर्षीय पुत्री घर के बाहर गली में खेल रही थी, तभी मोहल्ला फूलगढ़ी कोटला सादात निवासी फजरुद्दीन पुत्र असरफ उनकी पुत्री को टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया और खेत में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। उसकी पुत्री को गंभीर हालत में कुछ लोग घर लेकर आए। परिजन गंभीर हालत में बच्ची को थाने लेकर पहुंचे और रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज करते हुए बच्ची को उपचार के लिए सरकारी अस्पताल में भेज दिया। पुलिस ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म होने पर मामले की रिपोर्ट पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज की और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए। घटना नाबालिग के साथ होने के कारण मामले की सुनवाई अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट में चली। उन्होंने बताया कि मामला बेहद गंभीर होने के कारण उनके द्वारा न्यायालय में आरोपी के खिलाफ मजबूत साक्ष्य व गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश श्वेता दीक्षित ने शनिवार को मामले में निर्णय सुनाया। उन्होंने कहा कि प्रतिवादी पक्ष द्वारा कोई भी ऐसा साक्ष्य न्यायालय में पेश नहीं किया गया। जिससे घटना संदिग्ध प्रतीत होती हो। वहीं, वादी पक्ष के द्वारा न्यायालय में पेश किए गए गवाह व साक्ष्य घटना के होने को साबित करते है। जिसके आधार पर आरोपी फजरुद्दीन को उक्त मामले में दुष्कर्म का दोषी करार दिया जाता है और आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है। साथ ही दोषी पर बीस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया जाता है।
आरोपी को नहीं मिली जमानत
विशेष लोक अभियोजक हरेंद्र कुमार त्यागी ने बताया कि न्यायालय द्वारा सुनवाई के दौरान घटना को बेहद गंभीर माना गया था। जिसके चलते ही न्यायालय ने करीब पौने पांच वर्ष की सुनवाई के दौरान आरोपी को जमानत तक नहीं दी थी। आरोपी घटना के बाद से ही जेल में बंद है।
पीड़िता को एक लाख रुपये देने के आदेश
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पीड़ित को एक लाख रुपये की प्रतिकार धनराशि दे। यदि प्राधिकरण के पास उक्त धनराशि देने के लिए फंड न हो तो जिलाधिकारी एक माह के अंदर उक्त धनराशि पीड़िता को दे। साथ ही न्यायालय ने कहा कि अर्थदंड की अस्सी प्रतिशत धनराशि भी पीड़िता को दी जाए।