15 पशु और लंपी संक्रमित, 91 पहुंची संख्या
हापुड़। पशुओं में फैल रही लंपी बीमारी बढ़ती जा रही रही है, 15 पशुओं में बुधवार को बीमारी की पुष्टि हुई। जिन्हें आइसोलट कर, उपचार शुरू कर दिया गया है। जिले में संक्रमित पशुओं की संख्या बढ़कर 91 पहुंच गई है। राहत की बात यह है कि 21 पशु स्वस्थ भी हुए हैं। पशुपालन विभाग की टीमों ने गांवों का भ्रमण कर, बीमार पशुओं का उपचार शुरू कर दिया है।
शुकरामपुर में सबसे अधिक लंपी बीमारी के केस हैं, बुधवार को गांव श्यामपुर में भी तीन पशुओं में यह बीमारी मिली। पशुपालन विभाग की टीम ने तत्काल इनका उपचार शुरू कराया और पशुपालकों से संक्रमित पशुओं को अन्य पशुओं से दूर रखने की अपील की। बीमारी तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में पशुपालकों की भी नींद उड़ गई है।
बुधवार को 15 नए पशु संक्रमित मिले, जिसके बाद संख्या बढ़कर 91 हो गई है, इसके अलावा भी कई अन्य गांवों में संक्रमित पशुओं की संख्या काफी अधिक है। पशुपालन विभाग द्वारा बाहर से पशुओं की खरीद फरोख्त पर भी रोक लगा दी गई है। गलघोंटू और खुरपका का टीकाकरण भी शुरू कर दिया गया है।
इन गांवों में बीमारी का अधिक प्रकोप
गांव श्यामपुर, शुकरामपुर, धनपुरा, सबली, ददायरा, मलकपुर, बुकलाना, इकलैड़ी, बझैड़ा खुर्द, सपनावत, डिबाई, शरीकपुर, सिलारपुर, मुक्तेश्वरा, मतनौरा, अट्टा, औरंगाबाद।
पशु के संक्रमित होने का कारण-
* मवेशियों या जंगली भैंसों में यह रोग गांठदार त्वचा रोग वायरस (एलएसडीवी) के संक्रमण के कारण होता है।
* यह केप्रिपॉक्स वायरस जीनस के भीतर तीन निकट संबंधी प्रजातियों में से एक है, इसमें अन्य दो प्रजातियां शीपपॉक्स वायरस और गोटपॉक्स वायरस हैं।
लंपी रोग के लक्षण
* इस बीमारी में शरीर पर गांठें बनने लगती हैं. खासकर सिर, गर्दन, और जननांगों के आसपास।
* इसके बाद धीरे-धीरे गांठे बड़ी होने लगती हैं और फिर ये घाव में बदल जाती हैं।
* इस बीमारी में गाय को तेज बुखार आने लगता है।
* गाय दूध देना कम कर देती है।
* मादा पशुओं का गर्भपात हो जाता है।
* यह पूरे शरीर में विशेष रूप से सिर, गर्दन, अंगों, थन (मादा मवेशी की स्तन ग्रंथि) और जननांगों के आसपास दो से पाँच सेंटीमीटर व्यास की गांठ के रूप में प्रकट होता है।
* इसके अन्य लक्षणों में सामान्य अस्वस्थता, आंख और नाक से पानी आना, बुखार तथा दूध के उत्पादन में अचानक कमी आदि शामिल है।
सर्विलांस टीमें कर रही निगरानी
लंपी बीमारी की रोकथाम के लिए जिले में 12 सर्विलांस टीमें गठित कर दी गई हैं, साथ ही चार मोबाइल टीमें बनाई गई हैं। हर गांव में जाकर टीमें पशुओं के स्वास्थ्य का जायजा ले रहे हैं।
कोट-
लंपी बीमारी से पीड़ित पशुओं का उपचार किया जा रहा है। 21 पशु स्वस्थ हुए हैं, 70 का उपचार चल रहा है। सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। पशुपालक बीमारी पशुओं की जानकारी अवश्य दें। - डॉ. प्रमोद कुमार, सीवीओ।