गढ़मुक्तेश्वर में हाईवे किनारे झोपड़ी में सो रही मां के पास से 18 माह के मासूम बच्चे का चार लोगों ने अपहरण कर ढाई लाख रुपये में उत्तराखंड के काशीपुर में बेच दिया। पुलिस की तीन टीमें मामले की खुलासे के लिए लगीं और कड़ी जोड़ते हुए आरोपियों तक पहुंच गईं। पुलिस ने बच्चे को काशीपुर से बरामद करते हुए तीन अपहरणकर्ताओं समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। बच्चे को सकुशल बरामद करने वाली टीम को एसपी ने 25 हजार रुपये पुरस्कार की घोषणा की है।
गढ़मुक्तेश्वर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत ब्रजघाट क्षेत्र में हाईवे किनारे मित्रपाल अपनी पत्नी राखी व बच्चों के साथ झोपड़ी डालकर रहता है। वह मूल रूप से सदुपुरा थाना छजलैट जिला मुरादाबाद का रहने वाला है। 13 अगस्त की रात राखी का डेढ़ वर्षीय पुत्र राजकुमार उसके पास ही सोया हुआ था। सुबह आंख खुली तो राजकुमार लापता था। बच्चे को लापता देख माता पिता ने पुलिस से बच्चे की बरामदगी की गुहार लगाई। मामले में गढ़ पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज करते हुए बच्चे की तलाश शुरू की।
इस मामले में पुलिस ने उत्तराखंड के काशीपुर से बच्चे को सकुशल बरामद करते हुए अपहरण करने वाले तीन लोगों समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया। बच्चे का अपहरण अमरोहा के करनपुर खादर निवासी रोहताश, अमरोहा के गांव काकाठेर निवासी अवधेश व ओमदत्त ने एक अन्य साथी के साथ किया था। इसके बाद बच्चे को वैभव शर्मा निवासी कस्बा कोतवाली काशीपुर, जिला उधमसिंह नगर उत्तराखंड को ढाई लाख रुपये लेकर बेच दिया। बच्चे को बेचने में सहयोग करने वाले रिंकू उर्फ राजेंद्र निवासी गांव लखौरी राजपूत थाना नखासा व विपिन निवासी मोहल्ला कोर्टपूर्वी थाना कोतवाली जिला संभव को भी गिरफ्तार किया गया है। एक आरोपी फिलहाल फरार है।
कड़ी से कड़ी जोड़कर निकाला सुराग
एसपी दीपक भूकर ने पबताया कि मामले में बच्चे की बरामदगी को लेकर तीन टीमों को लगाया गया था। लेकिन बड़ी बात थी कि बच्चा गुम कैसे हुआ इसका कोई सुराग पुलिस के पास नहीं था। आसपास कोई सीसीटीवी कैमरा भी नहीं था। बच्चे का गरीब परिवार से ताल्लुक रखने के कारण रुपये के लिए अपहरण की आशंका भी नहीं बनता था। ऐसे में बच्चा चोरी गिरोह पर शक जा रहा था। इसके अलावा यह भी आशंका थी कि परिवार के ही किसी सदस्य ने बच्चे को न बेच दिया हो। ऐसे में पुलिस के एक इनपुट मिला कि उसी दिन से पास के ही एक ढाबे पर काम करने वाला युवक लापता है। उसकी सीडीआर व अन्य डिटेल निकाली गई तो लोकेशन झुग्गी के आसपास मिल गई। जिसके बाद पुलिस कड़ी जोड़ते हुए पहले अमरोहा और फिर काशीपुर तक पहुंच गई।
बहन की खुशी के लिए भाई ने ढाई लाख में खरीदा बच्चा
काशीपुर निवासी वैभव शर्मा की बहन के 4 बेटियां है, लेकिन बेटा न होने के कारण बहन को बेटे की चाहत थी। वैभव शर्मा ने संभल निवासी अपने साले विपिन कुमार शर्मा से बच्चा गोद दिलाने के लिए जिक्र किया। विपिन ने अपने परिचित रिंकू उर्फ राजेंद्र और विपिन को बच्चे की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी दी थी। जिसके बाद इन्होंने अमरोहा के दोस्त रोहताश को अच्छी रकम में बच्चे का इंतजाम करने का जिम्मा सौंपा था। जिसके बाद रोहताश ने लालच में आकर बच्चे के अपहरण का प्लान बनाया।
सड़कों के आसपास तलाशी झुग्गी झोपड़ी
अपहरण करने वालों में चार लोग रोहताश, उसका पुत्र लवकुश, अवधेश और ओमदत्त शामिल रहे। लवकुश यहीं पास स्थित एक ढाबे पर काम करता था। उसने ही कुछ स्थान चिन्हित किए थे। उसने बताया था कि सड़क किनारे झुग्गी झोपड़ियों से बच्चा चोरी किया जा सकता है। इसके बाद कई दिन घूमकर इन्होंने राखी की झुग्गी को निशाना बनाया।
ऐसे हुआ रकम का बंटवारा
ढाई लाख की रकम का भी बंदरबांट हुआ। इसमें से एक लाख रुपये रिंकू, 50 हजार रुपये विपिन शर्मा, 70 हजार रुपये रोहताश व उसके पुत्र लवकुश और तीस हजार रुपये एक अन्य वैभव शर्मा के रिश्तेदार के हिस्से में आए, जिसने रकम आरोपियों तक पहुंचाने का काम किया था।
रोहताश ने बाप बनकर कराया गोदनामा
रोहताश ने बच्चे को खुद को बेटा बताते हुए काशीपुर में गोदनामा कराया। जिसमें उसने बताया कि उसकी पत्नी मर चुकी है और वह दूसरी शादी करने जा रहा है, इसके लिए वह बच्चे को गोद दे रहा है।
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपी- फोटो : HAPUR