पोस्ट कोविड : एक साल पहले संक्रमित हुए मरीजों के सिकुड़ रहे फेफड़े
हापुड़। कोरोना की चपेट में आए लोगों को एक साल बाद भी संक्रमण सता रहा है। फेफड़ों में संक्रमण खत्म नहीं हुआ है जिसका दवाओं से उपचार संभव नहीं है। जिले में दो मामले सामने आए हैं, जिन्हें न्यूमोथोरैक्स (संकुचित फेफड़ों )नाम की बीमारी है। इससे सीने में तेज दर्द और सांस लेने में तकलीफ होती है। हापुड़ के अस्पतालों में इसका इलाज नहीं है, मरीजों को दिल्ली, गाजियाबाद का रुख करना पड़ रहा है।
एमडी चेस्ट डॉ. तुषार त्यागी ने बताया कि कोरोना के बाद से फेफड़ों के मरीज बढ़े हैं। फेफड़ों से जुड़ी एक और बीमारी है, जिसे न्यूमोथोरैक्स कहते हैं। यह स्थिति तब आती है जब फेफड़ों और छाती की दीवार के बीच में हवा पास होती है, इससे फेफड़ों पर हवा बाहर की तरफ से दबाव बनाती है, जिससे यह सिकुड़ जाते हैं। जब कोई व्यक्ति सांस लेता या छोड़ता है तो फेफड़े छाती की आंतरिक परतों में बढ़ते सिकुड़ते हैं, इस प्रक्रिया में फेफड़ों में वैक्यूम बनता है। न्यूमोथोरैक्स की स्थिति में फेफड़ों के ऊतकों में एक छेद या क्षति हो जाती है, इससे फेफड़ों के अंदर की हवा पूरी तरह से बाहर नहीं निकल पाती है और फेफड़ों का संतुलन बिगड़ जाता है। यही वजह है कि फेफड़े फूलने की जगह अधिक सिकुड़ने लगते हैं। इसका पता तब चलता है जब सीने में तेज दर्द और सांस की तकलीफ बनती है। अन्य लक्षणों में दिल की धड़कन तेज होना, ऊतकों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति के कारण त्वचा नीली पड़ना और थकान शामिल है।
केस नंबर एक -
मैं ऋषिकेश घूमने गया था, स्नान के लिए जैसे ही पानी के अंदर गया सीधे फेफड़े की तरफ तेज दर्द हुआ। आंखों के सामने अंधेरा छा गया, कुछ देर बाद स्थिति सामान्य हुई। लेकिन खांसी, और सांस की समस्या बनने लगी। एक्सरे और सीटी कराने पर न्यूमोथोरैक्स बीमारी की जानकारी मिली। अब उन्हें सर्जरी करानी पड़ी है। चिकित्सकों का कहना था कि दवाओं से इसका इलाज नहीं होता, सर्जरी ही विकल्प होती है।--हिमांशु।
केस नंबर दो---
पूरी तरह स्वस्थ थी, अचानक से सीने में हवा भर गई। गाजियाबाद के एक अस्पताल में जांच करायई। पता चला फेफड़े में हवा के गुल्ले बन गए हैं, जिसकी सर्जरी करानी पड़ी है। चिकित्सक पोस्ट कोविड के कारण ही यह समस्या होनी बता रहे हैं। - प्रिया।
कोट-
जिन मरीजों को कोरोना हुआ है उनके फेफड़ों में हवा के गुल्ले बनने की समस्या आ रही है। बहुत से मरीजों की सर्जरी कर, डैमेज लंग्स को हटाया है। इस बीमारी का इलाज दवा से संभव नहीं है, सर्जरी की एक मात्र विकल्प है। सर्जरी के बाद भी मरीज को फेफड़ों का व्यायाम करना जरूरी होता है, बचा फेफड़ा तभी खुल पाता है। - डॉ. भूषण, थोरेसिक सर्जन।